अंतर्राष्ट्रीय

सरकार ने 6 अन्य देशों के साथ मिलकर लांच किया ‘प्रोजेक्ट-75’

भारत समंदर का भी सिकंदर बन सके, इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 6 अन्य देशों के साथ मिलकर ‘प्रोजेक्ट-75’ लांच किया है, जिसके तहत कम से कम 6 एडवांस स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस पनडुब्बियां भारतीय नौसेना को मिलेंगी।

इसके लिए 70 हजार करोड़ रुपयों के लागत की संभावना जताई जा रही है, जिसमें फ्रांस, जर्मनी, रूस, स्वीडन, स्पेन और जापान हमारा साथ देंगे। ये पनडुब्बियां ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ‘मेक फार इंडिया’ होंगी।

भारत सरकार ने इस प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट-75(इंडिया) नाम दिया है

इसे ‘मदर ऑफ आल अंडरवॉटर डील्स’ भी कहा जा रहा है। हालांकि ये डील तय समय से 10 साल पीछे चल रही है, जिसे मोदी सरकार के नए ‘स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ पॉलिसी के तहत सबसे बड़ा काम माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने ‘स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ पॉलिसी को मई से शुरू किया था।

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वैसे, अभी इस प्रोजेक्ट की शुरुआत मात्र हुई है, पर जबतक ये डील पूरी होगी और भारतीय नौसेना को मिलेगी।

उस समय तक भारतीय नौसेना की मौजूदा पनडुब्बियां जर्जर हो चुकी होंगी। ये प्रोजेक्ट भारत के लिए इतना ज्यादा मायने रखता है कि भारत सरकार भी इसे जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है। लेकिन ये इतना आसान और जल्दी में होने वाला काम नहीं लगता।

इसके लिए पानी के जहाज और पनडुब्बियां बनाने वाली 6 विदेशी कंपनियों नेवल ग्रुप-डीसीएनएस(फ्रांस), थायस्सेक्रप मरीन सिस्टम्स(जर्मनी), रोसोबोरोनएक्सपोर्ट रूबिन डिजाइन ब्यूरो(रूस), नवनसिया(स्पेन), साब(स्वीडन) और मित्सुबिशी-कावासाकी हैवी इंडस्ट्रीज कॉम्बाइन(जापान) के साथ सहयोग करना होगा। अधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार इन पनडुब्बियों को बनाने में उन देशों का ही साथ लेंगी, जो टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी हमारे साथ होंगी। इसके अलावा मेंटिनेंस भी जिसकी कम हो, साथ ही बेहद कम समय में वो ऑपरेशनल मोड में आने में सक्षम हों।

भारत सरकार की योजना है नौसेना के पास हर समय कम से कम 18 डीजल चालित परंपरागत पनडुब्बियों के साथ 6 परमाणु शक्ति चालित पनडुब्बियां मौजूद रहें।

इसके अलावा चीन-पाक से निपटने के लिए कम से कम 4 लैस लंबी रेंज की परमाणु मिसाइलों से लैस पनडुब्बियां हों

सरकार इसी दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। यही वजह है कि इस 70 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट में तेजी लाई जा रही है। और इसके लिए भारत में काम कर चुके देशों को वरीयता दी जा रही है।

रूस, जर्मनी और फ्रांस के साथ भारत पहले भी पनडुब्बियों का सौदा कर चुकी है। प्रोजेक्ट 75(इंडिया) के तहत जापान अपनी सबसे मारक सोर्यू क्लास की 4200 टन वजनी पनडुब्बी भारत को देने के लिए तैयार है। और फ्रांस के साथ कलवरी क्लास की 4 पनडुब्बियों का काम पूरा होने वाला है।

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