‘ग्लोबल फूड मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की ओर अग्रसर भारत

खुल रहीं फूड प्रोसेसिंग की 10 हजार 500 इकाइयां

दिल्ली: भारत ‘ग्लोबल फूड मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। दरअसल, इस दिशा में केंद्र सरकार की ओर से कई विशेष कदम उठाए गए हैं। जी हां, केंद्र सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए 10 हजार 900 करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि भी रखी है।

करीब ढाई लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

महज इतना ही नहीं इससे लगभग ढाई लाख लोगों को रोजगार भी मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना को जब मंजूरी मिली, तब कहा गया था कि सरकार इसके जरिये ग्लोबल मार्केट में इंडियन फूड ब्रांड्स का विस्तार करना चाहती है। अब इसमें यही सच है कि जो राज्‍य अपने यहां जितनी योजनाएं बनाएगा और केंद्र का सहयोग लेगा, वह उतना ही अधिक अपने राज्य में रोजगार लाने में सफल हो जाएगा। इस दिशा में मध्य प्रदेश में इन दिनों बेहतर कार्य देखने को मिल रहा है। प्रदेश लगातार इस दिशा में प्रयासरत है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण में देश का अग्रणी राज्य बन गया है।

किसानों को मुहैया कराया जाएगा तकनीकी कौशल का ज्ञान

राज्य सरकार खाद्य प्रसंस्करण कारोबार से जुड़ने के लिए किसानों को तकनीकी ज्ञान मुहैया कराने के लिए आगे आई है। मध्य प्रदेश सरकार में खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सिंह कुशवाह का कहना है कि किसान खेती उत्पादन के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण से जुड़कर भी उपज के कारोबारी बनने की दिशा में काम करें। इस हेतु किसानों को फूड प्रोसेसिंग बिजनेस से जुड़ने के लिए टेक्निकल स्किल्स की जरूरत पड़ेगी, जिसके लिए सरकार उनकी मदद करने को तैयार है। सरकार द्वारा अब किसानों को आर्थिक मदद के साथ-साथ तकनीकी कौशल का ज्ञान भी मुहैया कराया जाएगा।

जहां हो रही फसल पैदा वहीं लगेगी माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज

वे कहते हैं कि आने वाले वर्षों में उद्यानिकी विभाग द्वारा 10 हजार 500 माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज को लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे लगभग 80 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। अब जरूरी यह है कि किसान जहां फसल पैदा कर रहा है उसी क्षेत्र में प्रसंस्करण उद्योग लगाए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था तो सुधरेगी ही, साथ ही साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने बताया है कि प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए आज अनेक उद्यमियों ने आवेदन किए हैं।

एक जिला एक उत्पाद को लेकर किया जा रहा कार्य

भारत सिंह कुशवाह का कहना यह भी है कि सरकार जो फूड प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित कराने जा रही है, इसमें से 262 इकाइयों को मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान ही मदद दी जाएगी। प्रदेश सरकार ने फूड प्रोसेसिंग के लिए 500 करोड़ रुपए का अनुदान देने का फैसला किया है। सरकार राज्‍य में एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत भी उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास कर रही है, जिसके तहत ग्वालियर जिले को आलू उत्पादन, शिवपुरी को टमाटर व श्योपुर को अमरूद के लिए चुना गया है। इसी तरह से अन्य जिलों को चुना गया है।

फूड प्रोसेसिंग बिजनेस से आय होगी दोगुनी

फूड प्रोसेसिंग से जुड़कर किसी एक परिवार का मुखिया ही नहीं बल्कि सदस्य भी आत्मनिर्भर हो पाएगा। पारंपरिक खेती पर निर्भर रहकर भी किसान अपनी आय को दोगुनी नहीं कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें उद्यानिकी फसलें भी अपनानी होंगी और आय को दोगुनी करने के लिए उपज के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग बिजनेस से भी जुड़ना होगा। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी, जिस आत्मनिर्भर भारत की बात अनेक अवसरों पर करते हैं, उसके लिए जरूरी है कि हम देश के किसान को सम्‍पन्‍न बनाए, फूड प्रोसेसिंग में बिजनेस एक ऐसा ही नवाचार है, जो हमारे छोटी जोत के किसान को भी आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है।

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