आरटीआई की रैंकिंग में देश को झट​का, मोदी राज मे पिछड़ा भारत

भारत अब श्रीलंका, मेक्‍स‍िको और अफगानिस्तान से भी पीछे

नई दिल्ली :

सूचना के अधि‍कार (आरटीआई ) अलग-अलग देश में आरटीआई की स्थिति को लेकर रेटिंग की गई थी। जिसमे खुलासा हुआ है कि RTI की रेकिंग मे भारत को बड़ा झटका लगा है। मोदी सरकार मे देश पिछड़ गया है ।

ताजा रैकिंग में भारत चौथे नंबर से फिसल कर छठे नंबर पर पहुंच गया है। भारत अब श्रीलंका, मेक्‍स‍िको और अफगानिस्तान से भी पीछे हो गया है। अफगानिस्तान इस साल पहले पायदान पर आ गया है।

साल 2011 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में अलग-अलग देश में आरटीआई की स्थिति को लेकर रेटिंग की गई थी तो उस वक्त भारत दूसरे स्थान पर था। 2012 में भी भारत की रैकिंग उसी स्तर पर बरकरार रही।

मगर 2014 में भारत 128 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गया। 2016 में भी भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया। वहीं 2017 में भारत और फिसलकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि भारत से 11 साल बाद आरटीआई कानून बनाने वाला श्रीलंका 131 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गया।

यह रेटिंग एक्सेस इंफो यूरोप और सेंट्रल फॉर लॉ एंड डेमेक्रेशी की तरफ से जारी की गई है। इसमें इस आधार पर रैंकिंग की गई है कि किस देश में सूचना के अधिकार के लिए बना कानून किस तरीके से काम कर रहा है।

सर्वे करने वाली ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के मुताबिक भारत में केंद्रीय सूचना आयुक्त कार्यालय सहित कई राज्यों में सूचना आयुक्तों के कार्यालयों में खाली पदों पर भर्ती नहीं हो पा रही।

इनमें सूचना आयुक्तों के 156 में से 48 पोस्ट खाली हैं। इसके अलावा हाल में आरटीआई एक्ट में बदलाव की कोशिश से भी लोगों में नाराजगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2017 में आरटीआई के तहत भारत में कुल 66.6 लाख आवेदन प्राप्त हुए।

इनमें से करीब 7.2 फीसदी यानी कुल 4.8 लाख आवेदनों को खारिज कर दिया गया जबकि 18.5 लाख आवेदन अपील के लिए सीआईसी के पास पहुंचे। इस दौरान सीआईसी ने आवेदकों के अपील पर 1.9 करोड़ रुपये का जुर्माना भी ठोका है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में केवल 10 राज्यों ने ही इससे जुड़ी वार्षिक रिपोर्ट अपडेट की है।

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