अंतर्राष्ट्रीय

पीएम मोदी ने ऐसे की थी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की पूरी प्लानिंग

पाकिस्तान पर भारत की सर्जिकल स्ट्राइक को एक साल पूरा हो रहा है. 28 सितंबर 2016 की रात पाकिस्तान के मुंह पर भारतीय सैनिकों ने करारा तमाचा मारा था.

कमांडोज पाकिस्तान की सीमा में घुसकर उसी के आतंकी और आतंकियों के लॉन्चिंग पैड ध्वस्त कर अपनी सरहद में लौट आए.

लेकिन उस रात सिर्फ जवानों ने ही अपना जज्बा नहीं दिखाया था. बल्कि दिल्ली में भी खलबली मची थी.

28 सितंबर की आधी रात, साउथ ब्लॉक

दिल्ली धीरे-धीरे नींद के आगोश में जा रही थी. ये रात कुछ ज्यादा ही काली थी. शायद अमावस की वजह से.

पूरा साउथ ब्लॉक रात की कालिमा और खामोशी की चादर में लिपटा हुआ था. ऐसा लग रहा था मानो दिल्ली की तरह रायसीना हिल भी गहरी नींद में जा चुकी है.

वॉर रूम में थी बेचैनी

मगर इस काली रात और घुप्प खामोशी के बीच इसी रायसीना हिल पर एक कमरे में अजीब सी बेचैनी का आलम था. यहां मौजूद हर शख्स की आंखों से नींद कोसों दूर थी.

कमरे में मौजूद हर शख्स के लिए अगले कुछ घंटे उनकी जिंदगी के सबसे अहम पल साबित होने वाले थे.

भारतीय सेना के तीनों प्रमुख, खुफिया एजेंसियों के हेड और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की नजरें सीधे एलओसी पर गड़ी थीं.

मिशन बस शुरू होने वाला था. सरहद पार भारतीय फौज के इतिहास का सबसे बड़ा ऑपरेशन.

प्रधानमंत्री निवास पर थी खामोशी

प्रधानमंत्री निवास भी पूरी तरह सन्नाटे और खामोशी में डूबा था. सुरक्षा गार्ड्स को छोड़ कर प्रधानमंत्री निवास के करीब-करीब सभी कर्मचारी तक सो चुके थे.

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने सख्त रुटीन के बावजूद अब भी जाग रहे थे. वो सोए नहीं थे ताकि जान सकें कि उनके लिए अब तक के सबसे बड़े फैसले का अंजाम क्या हुआ?

ऐसे शुरु हुई सर्जिकल स्ट्राइक की प्लानिंग

सर्जिकल स्ट्राइक की भूमिका उसी दिन से तैयार हो चुकी थी, जब 19 सितंबर को उरी में आर्मी कैंप को आतंकियों ने निशाना बनाया. इस हमले में 19 जवान शहीद हो गए.

वहीं हमले में मारे गए आतंकवादियों, उनके पास से बरामद जीपीएस सेट और जिंदा पकड़े गए दो गाइड्स से खुलासा हो चुका था कि ये एक आतंकवादी हमला था.

आतंकवादियों का ताल्लुक  जैश-ए-मोहम्मद से था और वो पाकिस्तान के रास्ते उरी में दाखिल हुए थे.

शुरु हुई सरकार की आलोचना

हमले की खबर जैसे-जैसे फैल रही थी देश में गुस्सा बढ़ता जा रहा था. सेना के जवानों की शहादत आम हिंदुस्तानियों का खून खौला रही थी.

लोगों के मूड ने मोदी सरकार पर लगातार दबाव बनाना शुरु कर दिया था. देश में चारों तरफ से हमले के खिलाफ और हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की आवाजें उठनी शुरू हो चुकी थीं.

इसके बाद से ही पाकिस्तान को उसी के अंदाज में सबक सिखाने की प्लानिंग शुरु हो गई.

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