राष्ट्रीय

2050 तक भारत की बिजली हो जाएगी क्लीन: स्टडी

भारत को 2050 तक पर्यावरण पर भारी पड़ने वाले बिजली के स्रोतों से मुक्ति मिल जाएगी। एक स्टडी में दावा किया गया है कि क्लाइमेट चेंज के असर से निपटने के लिए भारत जिस तरह से क्लीन एनर्जी के उत्पादन पर जोर दे रहा है, उसे देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं है। फिनलैंड की लैपीनरैंटा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी ने अपनी एक स्टडी में कहा है कि जहां भारत इस लक्ष्य को 2050 तक हासिल कर लेगा, वहीं रूस और केंद्रीय एशिया के देश अपनी 100 प्रतिशत बिजली क्लीन स्रोतों से हासिल करने लगेंगे। इसी तरह साउथ अमेरिका, ईरान और मध्य पूर्व के देश भी इस लक्ष्य को 2030 तक हासिल कर लेंगे।

गौरतलब है कि क्लाइमेट चेंज पर हुए पैरिस करार और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए भारत की 2022 तक सूरज की रोशनी से एक लाख मेगावॉट और हवा से 60 हजार मेगावॉट बिजली बनाने की योजना है। इसके साथ ही बायोमास और छोटी पनबिजली परियोजनाओं से भी बिजली उत्पादन बढ़ाने की योजना है। लैपीनरैंटा यूनिवर्सिटी का कहना है कि भारत में क्लीन एनर्जी प्रॉजेक्ट्स जिस रफ्तार से स्थापित किए जा रहे हैं, उससे इस बात के संकेत मिलते हैं कि भारत को 2050 के बाद बिजली के लिए कोयले और गैस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही इससे इस सेक्टर में लाखों नई जॉब्स भी पैदा होंगी।

काउंसिल ऑफ एनर्जी, इन्वायरनमेंट ऐंड वॉटर (CEEE) ने अपनी एक स्टडी में कहा है कि क्लीन एनर्जी के मामले में भारत के प्लान से अगले 10 सालों में देश में कम से कम 12 लाख नई जॉब पैदा होंगी।

इनमें से 10 लाख से ज्यादा जॉब तो अकेल सोलर पावर फील्ड में होंगी। विंड पावर से अगले सात सालों में करीब दो लाख नई जॉब पैदा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जो जॉब पैदा होंगी, वे अलग हैं। सरकार जमीन की गर्मी से बिजली बनाने के लिए भी कमर कस रही है। इन सेक्टर्स में भी रोजगार के नए मौके मिलने तय हैं।

Summary
Review Date
Reviewed Item
क्लाइमेट चेंज
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.