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अमेरिका के साथ सौदा मंजूर, भारत को मिलेगा 6 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर

अमेरिका ने भारत को 93 करोड़ डॉलर में 6 एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर बेचने के सौदे को मंजूरी दे दी है. अटैक हेलीकॉप्टर के अतिरिक्त इस अनुबंध में फायर कंट्रोल रडार ‘हेलफायर लॉन्गबो मिसाइल’, स्टिंगर ब्लॉक I-92H मिसाइल, रात में नजर रखने में सक्षम नाइट विजन सेंसर और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम्स की बिक्री भी शामिल है. पेंटागन की डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी ने इस संबंध में विदेश मंत्रालय के फैसले को लेकर कांग्रेस को अधिसूचित किया. अगर कोई सांसद इसका विरोध नहीं करता है तो बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है.

पेंटागन ने कांग्रेस को अधिसूचना अगले महीने वाशिंगटन डीसी में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली पहली 2+2 वार्ता से पहले दी है. अगले महीने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके अमेरिकी समकक्षों माइक पोम्पिओ और जेम्स मैटिस के बीच बैठक होगी. अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने बुधवार को कहा कि इससे अंदरूनी और क्षेत्रीय खतरों से मुकाबले की भारत की क्षमता को मजबूती मिलेगी.

अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर बहुभूमिका वाले हेलीकॉप्टर हैं. अमेरिकी सेना और कई दूसरे देशों के रक्षा बल इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. हेलीकॉप्टर अपने आगे लगे सेंसर की मदद से रात में उड़ान भर सकता है. कांग्रेस को भेजी गयी अपनी अधिसूचना में पेंटागन ने कहा, “इससे अंदरूनी और क्षेत्रीय खतरों से मुकाबले की भारत की क्षमता को मजबूती मिलेगी.”

पेंटागन ने कहा, “एएच-64ई के सहयोग से जमीनी बख्तरबंद खतरों से मुकाबले की भारत की रक्षा क्षमता बढ़ेगी और इसका सैन्य बल आधुनिक होगा.” इसके अनुसार, “उपकरणों की प्रस्तावित बिक्री और सहयोग से क्षेत्र में मूलभूत सैन्य संतुलन नहीं बिगड़ेगा.”

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा कारोबार वर्ष 2008 से करीब शून्य से 15 अरब डॉलर तक बढ़ा है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, “अगले दशक तक सैन्य आधुनिकीकरण पर भारत के अरबों डालर खर्च करने की संभावना है और हम अमेरिकी उद्योग जगत के लिये यह मौका हासिल करने को इच्छुक हैं. ऐसी बिक्रियों से ना सिर्फ हमारे रक्षा सहयोग को समर्थन मिलेगा बल्कि इनसे देश के अंदर नौकरियां भी पैदा होंगी.”

हाल के वर्षों में अमेरिका ने सरकारी स्तर पर भारत को सी-17 परिवहन विमान, 155 मिमी लाइट-वेट टोड होवित्जर, यूजीएम-84एल हारपून मिसाइल, सपोर्ट फॉर सी-130जे सुपर हरक्युलिस विमान और रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) सहयोग उपकरण बेचे हैं.

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