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ईरान से तेल आयात बढ़ाएगा भारत, ईरानी तेल क्षेत्र में हिस्सेदारी लेने में दिखाई दिलचस्पी

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह ईरान के फरजाद-बी गैस क्षेत्र और इसे खोजने वाले ओएनजीसी विदेश लिमिटेड के बीच समझौता होने को लेकर ‘सकारात्मक’ हैं.

र (17 फरवरी) को ईरान से एक उत्पादक तेल क्षेत्र में हिस्सेदारी लेने की इच्छा जताई है और कहा है कि अप्रैल से शुरु होने वाले नए वित्त वर्ष में वह ईरान से तेल आयात बढ़ाएगा. चालू वित्त वर्ष में भारत ने ईरान से तेल आयात में 25% तक कटौती की थी. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बिजान नामदार जांगेनेह के साथ बातचीत के बाद कहा कि वह ईरान के फरजाद-बी गैस क्षेत्र और इसे खोजने वाले ओएनजीसी विदेश लिमिटेड के बीच समझौता होने को लेकर सकारात्मक हैं.

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उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 में भारत की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल कंपनियां प्रतिदिन पांच लाख बैरल कच्चा तेल खरीदेंगी. यह चालू वित्त वर्ष के अनुमानित 3,70,000 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात से लगभग 25% अधिक होगा. भारत ने ओएनजीसी विदेश लिमिटेड को फरजाद-बी का ठेका देने में देरी करने के चलते ईरान से तेल आयात में करीब 25% कमी कर दी थी.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शनिवार (17 फरवरी) को दोहराया कि उनका देश आखिरी सांस तक उस परमाणु समझौते की शर्तों का पालन करेगा जो कि उसने दुनिया के प्रमुख ताकतवर देशों के साथ किया था. रूहानी ने इसके साथ ही आगाह भी किया कि अगर यह समझौता टूटा तो अमेरिका को पछताना पड़ेगा. रूहानी की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है जिसमें ट्रंप ने समझौते से हटने की धमकी दी. उन्होंने परमाणु समझौते की समीक्षा की मांग की थी.

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रूहानी ने कहा, देश के रूप में हम (अपनी प्रतिबद्धताओं का) हमेशा पालन करते हैं. हम (इस समझौते का) उल्लंघन नहीं करेंगे और इसमें बने रहेंगे. यह तो अल्लाह का आदेश है. अगर हम कोई समझौता करते हैं तो हम अपनी आखिरी सांस तक उसका पालन करेंगे. भारत यात्रा पर आए रूहानी यहां ईरान की विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर संबोधन दे रहे थे. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मोलभाव का समय अब नहीं रहा और समझौते पर हस्ताक्षर कि बाद इस पर विचार करना हास्यास्पद है.

भारत ने शनिवा

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