अंतर्राष्ट्रीय

चीन से चौकस भारत, सीमा सुरक्षा को यह प्लान

उत्तराखंड: सिक्किम सेक्टर के डोकलाम क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 2 महीने से अधिक समय तक चली तनातनी के बाद भारत सीमा सुरक्षा को लेकर चौकन्ना हो गया है।

सरकार चीन सीमा की सुरक्षा को और बेहतर करना चाहती है। चीन के साथ लगते बॉर्डर की सुरक्षा और विकास की समीक्षा के लिए लेकर केंद्र सरकार एक स्टडी ग्रुप गठित करने जा रही है।

खासतौर पर सीमांत लोगों को मुख्यधारा में शामिल करने पर फोकस किया जाएगा। स्टडी ग्रुप चीन की सीमा से सटे राज्यों की सरकारों और दूसरे प्रतिनिधिमंडलों के साथ भी बातचीत करेगा। यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री को सौंपी जाएगी।

उत्तराखंड स्थित चीन बॉर्डर के अग्रिम इलाकों का दौरा करने वाले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पीटीआई से कहा, ‘जल्द ही इस ग्रुप का गठन किया जाएगा।

ग्रुप पांच राज्यों में फैली 4,000 किलोमीटर लंबी इस सीमा पर उन सभी पहलुओं का अध्ययन करेगा, जिनसे चुनौती है और सुधार की आवश्यकता है।’

चमोली जिले में ITBP जवानों से मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ग्रुप उन उपायों पर भी गौर करेगा जिससे इन राज्यों में सीमा से लगती सड़कों के निर्माण में तेजी लाई जा सके।’

गृहमंत्री ने जोशीमठ में दिए अपने भाषण में इस बात को रेखांकित किया कि था कि इन इलाकों में सरकारी सपॉर्ट सिस्टम को बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने सीमांत इलाकों में रहने वाले लोगों को ‘रणनीतिक संपत्ति’ बताते हुए कहा था कि इन्हें महत्व देने की आवश्यकता है।

उन्होंने सीमा की सुरक्षा में जुटे बलों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि सीमांत इलाकों में रह रहे लोग पलायन ना करें।

इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के एक अधिकारी ने कहा, ‘सीमा से सटे इलाकों में रहने वाले लोग देश की आंख और कान होते हैं।

यदि वे यहां नहीं रहेंगे तो स्थिति चिंताजनक होगी।’ उन्होंने कहा, ‘इन मुद्दों के अलावा स्टडी ग्रुप इस बात की भी समीक्षा करेगा कि चीन बॉर्डर पर सुरक्षा और डिफेंस सिस्टम को बढ़ाने के लिए और क्या करने की जरूरत है।’

3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा जम्मू-कश्मीर (1,597 किमी), हिमाचल प्रदेश (200 किमी), उत्तराखंड (345 किमी) सिक्किम (220 किमी) और अरुणाचल प्रदेश (1,126 किमी) में फैली है। दोनों देशों की सीमाएं पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और इस वजह से अक्सर सीमा विवाद उत्पन्न होते हैं।

दुर्गम इलाकों से गुजरने वाली इस सीमा के पर डिवेलपमेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव है। इसमें सुधार के लिए सरकार ने 73 सड़कों के निर्माण का फैसला किया है।

इनमें से 804 किलोमीटर लंबी 27 सड़कों का निर्माण गृह मंत्रालय करा रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में बन रही इन सड़कों पर 1,937 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है।

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