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ऑनलाइन रेल टिकट लेते वक्त देते हैं इंश्योरेंस के पैसे, तो आपके काम की है यह खबर

सूचना के अधिकार (आरटीआई) से खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन रेलवे टिकटों पर दुर्घटना बीमा योजना के तहत निजी क्षेत्र की तीन कंपनियों को एक सितंबर 2016 से 31 जुलाई तक 24.53 करोड़ रुपये की प्रीमियम राशि का भुगतान किया गया. लेकिन इस अवधि में महज 25 बीमा दावा प्रकरणों में कुल 2.06 करोड़ रुपये का मुआवजा अदा किया गया.

मध्यप्रदेश के नीमच ​निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बताया कि इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) के एक संयुक्त महाप्रबंधक ने उन्हें यह जानकारी दी है.

गौड़ की आरटीआई अर्जी पर भेजे गये जवाब में बताया गया कि ऑनलाइन रेलवे टिकटों पर दुर्घटना बीमा योजना के लिये तीन कम्पनियों- आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कम्पनी, रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस कंपनी और श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कम्पनी से अनुबंध किया गया है.

गौरतलब है कि इन कंपनियों को निविदा प्रक्रिया से चुना गया है. आरटीआई से पता चलता है कि ऑनलाइन रेलवे टिकटों पर एक सितंबर 2016 से शुरू हुई दुर्घटना बीमा योजना के तहत 31 जुलाई तक 26 करोड़ 67 लाख 24 ​हजार 913 यात्रियों का बीमा कराया गया.

इसके एवज में तीनों कम्पनियों को प्रति यात्री 92 पैसे के प्रीमियम की दर से कुल 24 करोड़ 53 लाख 86 हजार 920 रुपये की राशि का भुगतान किया गया. इस योजना के तहत 31 जुलाई तक 25 बीमा दावा मामलों में कुल दो करोड़ छह लाख 20 हजार 14 रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया.

बहरहाल, आरटीआई के तहत सामने आये जवाब से विशिष्ट तौर पर स्पष्ट नहीं होता कि आलोच्य अवधि में किस कम्पनी को कितना प्रीमियम मिला और किस कम्पनी ने कितने बीमा दावों का निपटारा किया.

गौड़ ने कहा, “पिछले एक साल में अलग-अलग रेल दुर्घटनाओं में सैंकड़ों यात्री हताहत हुए जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल होंगे जो आईआरसीटीसी की वेबसाइट से बुक ई-टिकट से यात्रा कर रहे थे.

ऐसे में यह बात जाहिर तौर पर चौंकाती है कि 11 महीने की आलोच्य अवधि में ऑनलाइन रेलवे टिकटों पर दुर्घटना बीमा योजना के तहत केवल 25 बीमा दावों में मुआवजे का भुगतान किया गया.”

उन्होंने कहा कि रेलवे को जरूरी कदम उठाते हुए सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी कंपनियां इस योजना के लम्बित बीमा दावों का तेजी से निपटारा करें ताकि संबंधित लोगों को समय पर इसका फायदा मिल सके.

आरटीआई से यह अहम जानकारी भी मिलती है कि इस योजना को तय वेब माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले सभी रेल यात्रियों के लिये 10 दिसंबर 2016 से मुफ्त किया जा चुका है, यानी अब इस योजना के प्रीमियम का भुगतान सरकारी खजाने से किया जाता है.

हर पात्र रेल यात्री के बीमा के बदले संबंधित कंपनी को 92 पैसे का प्रीमियम चुकाया जाता है. इस योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपये के मुआवजे के भुगतान का प्रावधान है.

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