भारतीय रेलवे ने 100% पैसेंजर कोच में लगाये बायो टॉयलेट

पटरियों पर नहीं गिरेगी गंदगी..

दिल्ली : कुछ साल पहले तक रेलवे लाइन या प्लेटफॉर्म पर बैठ कर ट्रेन का इंतजार करना काफी मुश्किल होता था। ट्रेन की पटरियों यानि रेलवे लाइन पर गिरने वाले मानव मल और पानी से पूरे स्टेशन परिसर में गंदगी फैल जाती थी, लेकिन स्वच्छ भारत अभियान के तहत यात्रियों के लिए यात्रा सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए रेलवे की और से कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के क्रम में अब ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत’ अभियान के तहत ट्रेनों में अब बायो टॉयलेट लगाए गए हैं। इस कदम से अब रेल की पटरियों पर टॉयलेट की गंदगी नहीं गिरेगी। प्लेटफार्म भी अब पूरी तरह साफ-सुथरे रहेंगे।

दरअसल रेलवे ने 73,078 यात्री ट्रेन डिब्बों में 2,58,906 बायो टॉयलेट लगाकर स्वच्छ भारत मिशन में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस पहल से अब पटरियों पर गंदगी दिखना बंद हो चुकी है। बता दें कि इससे पहले तक भारतीय रेलवे के ट्रैक्स पर प्रतिदिन 2,74,000 लीटर ह्यूमन वेस्ट गिरता था, जिससे गंदगी तो फैलती ही थी, साथ ही रेलवे ट्रैक्स के इंफ्रास्ट्रक्चर भी खराब हो जाते थे, जिस कारण प्रतिवर्ष 400 करोड़ की हानि पहुंचती थी, जो अब बंद हो जाएगी।

बायो टॉयलेट इस तरह करता है काम

बायो टॉयलेट का आविष्कार डीआरडीओ तथा भारतीय रेलवे द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। बायो टॉयलेट में शौचालय के नीचे बायो डाइजेस्टर कंटेनर में एनेरोबिक बैक्टीरिया होते हैं, जो मानव मल को पानी और गैसों में परिवर्तित कर देते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए मल के सड़ने के बाद मीथेन गैस और पानी ही शेष बचते हैं। इस पानी को री-साइकिल कर शौचालयों में इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि गैसों को वातावरण में छोड़ दिया जाता है। वहीं दूषित जल को क्लोरिनेशन के बाद पटरियों पर छोड़ दिया जाता है।

बायो टॉयलेट्स के फायदे

>अब तक कोच में लगने वाले फ्लैश टॉयलेट का एक बार प्रयोग करने पर कम से कम 10 से 15 लीटर पानी खर्च होता था जबकि वैक्यूम आधारित बायो टॉयलेट में एक फ्लश में करीब आधा लीटर पानी ही इस्तेमाल होता है।

>अब तक से चल रहे शौचलाओं में मानव मल को सीधे रेल की पटरियों पर छोड़ दिया जाता था, जिससे पर्यावरण में गंदगी फैलने के साथ ही रेल पटरियों की धातु को नुकसान पहुंचता था, बायो टॉयलेट से ये समस्या दूर होगी।

>रेलवे स्टेशन अब साफ सुथरे और बदबू रहित होंगे, जो कई बीमारियों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

>बायो टॉयलेट्स के इस्तेमाल से मानव मल को हाथ से उठाने वाले लोगों को इस गंदे काम से मुक्ति मिल जाएगी।

पूर्वोत्तर रेलवे के 100 प्रतिशत कोचों में लगेगा बायो टॉयलेट

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत मिशन’ के अंतर्गत पूर्वोत्तर रेलवे के लगभग 100 प्रतिशत कोचो में बायो टॉयलेट लगाने का कार्य पूरा हो गया है। कुछ कोच शेष बचे हैं, उनमें भी बायो टॉयलेट लगाने की प्रक्रिया चल रही है। यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में पहली बार डबल डेकर कोचों में बायो टॉयलेट लगाए जाने का कार्य किया जा रहा है।

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button