उत्तर प्रदेशराज्य

रेल हदसों से सबक, 3 महीने में बदलाव का टारगेट

कानपुर: ताबड़तोड़ ट्रेन एक्सिडेंट्स, ट्रैक फ्रैक्चर की सैकड़ों घटनाएं और यात्री सुरक्षा के ढेरों सवालों के बीच रेलवे ने बदलाव के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों-कर्मचारियों को मौखिक तौर पर बता दिया गया है कि अगले 3 महीने में हालात संभालने हैं।

ट्रैक पर रिपेयरिंग के लिए ब्लॉक तुरंत क्लियर किए जा रहे हैं। गैंगमैन और अन्य ग्राउंड स्टाफ से बात कर मौके पर ही उनकी समस्याएं निपटाईं जा रही हैं।

बीते एक साल में हुए कई एक्सिडेंट्स के बाद रेलवे पर कई तरह के सवाल उठे। जांच में पटरियों के रखरखाव और गैंगमैन के पास मटीरियल्स की कमी की बातें सामने आईं।

अगस्त में रेलवे बोर्ड में हुए बदलावों के बाद अब रेलवे की सेहत सुधारने के लिए कई कोशिशें शुरू की गई हैं।

एंटी फॉग लाइट्स

नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बंसल के मुताबिक, सर्दी के मौसम के मद्देनजर सारे इंजनों में एंटी फॉग लाइट्स लगाई जा रही हैं।

अधिकारियों के निरीक्षण में क्वॉलिटी पर विशेष फोकस है।

कर्मचारियों का उत्साहवर्धन

रेलवे के अधिकारियों-कर्मचारियों का मनोबल काफी नीचे चला गया था। इसे बढ़ाने के लिए गैंगमैन, जूनियर इंजिनियर और बाकी छोटे कर्मचारियों की समस्याएं गंभीरता से सुनी जा रही हैं।

उनके तुरंत समाधान भी खोजे जा रहे हैं। बड़े अधिकारी भी छोटे कर्मचारियों की समस्याएं सुन रहे हैं। रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक, ट्रैक मेंटनेंस की सबसे महत्वपूर्ण इकाई गैंगमैन को पूरी वस्तुस्थिति पता रहती है।

उन्हें ‘शॉर्टकट’ से दूर रहने और रखरखाव में नियमों का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है।

खरीद का विकेंद्रीकरण

अब तक रेलवे में सेफ्टी से संबंधित मटीरियल्स की खरीदारी एकीकृत थी। अब इसे लोकल लेवल पर विकेंद्रीकृत कर दिया गया है।

कहा गया है कि जरूरत पर अच्छे वेंडर्स से तुरंत मटीरियल्स की खरीदारी करें।

‘बदलाव’ दिखना शुरू 


रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक, बदली वर्किंग में हालात बदलने की उम्मीद है। मौखिक तौर पर मेसेज मिल गया है कि 3 महीने में सुधार या बदलाव दिखना चाहिए।

यह काफी ‘शॉर्ट पीरियड’ है। लेकिन भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। पहले टारगेट टाले जाते थे, लेकिन अब उन्हें पहले ही पूरा किया जा रहा है।

ब्लॉक देने में चुस्ती


बिजी ट्रैकों पर ट्रेनों को समय से दौड़ाने के लिए रेलवे में ट्रैफिक का हमेशा इंजिनियरिंग से झगड़ा चलता था। इस वजह से पटरियों का रखरखाव मुश्किल हो गया था।

अब मेंटनेंस से संबंधित सारे ब्लॉक तुरंत क्लियर किए जा रहे हैं। कहीं ज्यादा और लंबे ब्लॉक्स की जरूरत है तो उसे भी रोका नहीं जा रहा है। इसे महत्वपूर्ण प्रियॉरिटी में रखा गया है।

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