कश्मीर: चीन ने पाक को इसलिए दिया ‘झटका’

नई दिल्ली: चीन ने कहा है कि कश्मीर मसला भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। इस विवाद में संयुक्त राष्ट्र के दखल की इस्लामी सहयोग संगठन की मांग को भी चीन ने खारिज कर दिया है।

इस्लामी सहयोग संगठन कश्मीर पर यूएन का रेजॉलूशन लागू करने की मांग करता है। पाक इस संगठन का मेंबर है और उसके पीएम ने भी रेजॉलूशन पर अमल की मांग की है, लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि कश्मीर पर हमारी नीति साफ है।

माना जा रहा है कि अपने महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट ‘वन बेल्ट वन रोड’ को लेकर चीन बेचैन है, इसलिए उसका यह रुख सामने आया है।

देखा गया है कि कश्मीर पर चीन की नीति हमेशा एक जैसी नहीं रही है। 50 के दशक में वह इस मामले में न्यूट्रल था, लेकिन 60 और 70 के दशक में भारत-चीन संबंध बिगड़े तो चीन ने पाकिस्तान के करीब आने के मकसद से कश्मीर पर उसके रुख का समर्थन किया।

80 के दशक में जब भारत-चीन संबंध सुधारने की कोशिश शुरू हुई तो कश्मीर पर उसका स्पष्ट बयान सामने आया। इसमें कहा गया कश्मीर इतिहास का अनसुलझा और द्विपक्षीय मुद्दा है, जिसे भारत और पाकिस्तान के बीच शांति के साथ सुलझाया जाना चाहिए।

चीन का यह रुख 90 के दशक में भी कायम रहा, लेकिन भारत के ऐटमी टेस्ट ने उसकी चिंता बढ़ा दी और उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी। पिछले साल जुलाई में चीन और पाकिस्तान के सैनिक पहली बार साथ मिलकर गश्त करते दिखे थे।

इस साल डोकलाम का विवाद सामने आने के बाद जुलाई में चीन ने भारत-पाक संबंध सुधारने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने की पेशकश की थी, जिसे भारत ने खारिज कर दिया।

चीन की असल चिंता उसके ‘वन बेल्ट वन रोड’ को लेकर है, जिसका एक हिस्सा पाक अधिकृत कश्मीर से जुड़ा है। भारत इसी कारण इस प्रॉजेक्ट का विरोध करता है।

इस प्रॉजेक्ट पर चीन में हुए सम्मेलन का भारत ने बायकॉट किया था, जिसके बाद डोकलाम का विवाद सामने आया।

भारत ने प्रॉजेक्ट के मुद्दे पर झुकने की जगह इसके पारदर्शी ना होने का मुद्दा हाल में कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इशारों-इशारों में उठाया। माना जा रहा है कि इसी वजह से चीन पर दबाव बढ़ा कि वह कश्मीर पर खुद को अलग दिखाए।

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