चीन के खिलाफ भारत का ट्रेड वार हो सकता है खतरनाक

भारत चीन के खिलाफ संरक्षणवादी नीतियां अपनाकर यूएस की राह पर आगे बढ़ता दिख रहा है.

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एक ट्वीट ने वैश्विक स्तर पर ‘ट्रेड वॉर’ की शुरुआत कर दी। जानकारों का कहना है कि ग्लोबल ट्रेड वॉर से बेरोजगारी बढ़ेगी, आर्थिक रफ्तार कम होगी और ट्रेडिंग पार्टनर्स के रिश्ते बिगड़ेंगे।

चीन के खिलाफ अमेरिका के ट्रेड वॉर में दुनिया भर के कई देश शामिल हो रहे हैं. चीन के खिलाफ भारत के ट्रेड वॉर शुरू करने पर चीन ने अब चेतावनी दी है. चीन की सरकार का मुखपत्र कहे जाने वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि ट्रेड वॉर में अमेरिका के साथ भारत का आना खुद उसके लिए जोखिम भरा कदम साबित होगा.

चीनी सरकारी अखबार में छपे एक संपादकीय में कहा गया है, “भारत चीन के खिलाफ संरक्षणवादी नीतियां अपनाकर यूएस की राह पर आगे बढ़ता दिख रहा है. संभव है कि भारत ट्रेड वार्ता से पहले यूएस को खुश करने की कोशिश कर रहा हो या फिर भारत दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन के मुद्दे पर भी ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा है.

अखबार ने चीनी विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि ऐसा करके भारत एक खतरनाक खेल में कूद रहा है क्योंकि व्यापार में भारत को यूएस से कोई फायदा नहीं मिलने वाला है. इससे चीन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिशों पर पानी फिर जाने का भी खतरा है.

बता दें कि भारत के वाणिज्य विभाग ने सोमवार को चीन से आयातित सोलर सेल्स और मॉडयूल्स पर 25 फीसदी टैरिफ रखने का सुझाव दिया था. भारत के इसी कदम से चीन को दिक्कत हो रही है.

अखबार ने आगे लिखा है, हालांकि इस प्रस्ताव को अभी भारत सरकार की मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन अगर भारत इन टैरिफ के साथ जाता है तो चीनी कंपनियों पर इसका असर बहुत ही कम होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि चीन भले ही भारत को बड़े स्तर पर सोलर सेल्स और मॉड्यूल्स की आपूर्ति करता हो लेकिन कुल आपूर्ति की तुलना में यह बहुत थोड़ा है.

इस संपादकीय में आगे लिखा गया है कि भारत का ये कदम बड़ी रणनीति की तरफ इशारा करता है. भारत स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ में छूट की उम्मीद में यूएस के साथ-साथ खड़े होने की कोशिश करता नजर आ रहा है. भारत चीन के साथ बढ़ रहे व्यापार घाटे का भी हल निकालने की कोशिश करेगा जो 2017 में 62.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.

ग्लोबल टाइम्स ने नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनैशनल स्ट्रैटजी के रिसर्च फेलो लिअु शियाशो के हवाले से लिखा है- भारत अपने व्यापार घाटे को लेकर बहुत ही संवेदनशील हो गया है इसलिए वह चीन से बाजार में ज्यादा पहुंच बनाने के लिए यूएस के साथ हाथ मिला रहा है.

Back to top button