भारतीय बिजनेसमैन को H-1B वीजा फ्रॉड के अपराध में 28 महीने की सजा

अमेरिका में जहां एच-1बी वीजा के तहत रह रहे भारतीयों के लिए मुश्किलें चल रही हैं, वहीं एक भारतीय बिजनेसमैन को वीजा फ्रॉड के अपराध में 28 महीने की सजा हो गई है

भारतीय बिजनेसमैन को H-1B वीजा फ्रॉड के अपराध में 28 महीने की सजा

अमेरिका में जहां एच-1बी वीजा के तहत रह रहे भारतीयों के लिए मुश्किलें चल रही हैं, वहीं एक भारतीय बिजनेसमैन को वीजा फ्रॉड के अपराध में 28 महीने की सजा हो गई है. यहां तक उसे परिवार सहित भारत डिपोर्ट कर दिया जाएगा.

वर्जीनिया में रहने वाले राजू कोसूरी पर ‘वीजा फॉर सेल’ के जरिए एच-1बी वीजा प्रोग्राम का दुरुपयोग करने का दोष साबित हुआ है. ये केस एक साल पहले ही सामने आ गया था, जिसमें कोसूरी की सजा की घोषणा अब हुई है.

वर्जीनिया की फेडरल कोर्ट ने कहा है कि कोसूरी ने एच-1बी प्रोग्राम के तहत वीजा फॉर सेल सिस्टम के जरिए कई स्पेशलाइज्ड फॉरेन वर्कर्स के लिए वीजा अप्लाई करवाकर लगभग 2 करोड़ की रकम बना ली. कोसूरी ऐसे ही कई शेल कंपनियों यानी फर्जी कंपनियों के लिए इमिग्रेंट्स से फर्जी वीजा अप्लाई करवाता था. ये कंपनियां वास्तव में होती ही नहीं थीं. उसने लगभग 800 से ज्यादा अवैध आव्रजन लाभों के लिए फर्जी आवेदन किया था. कोसूरी को इन इमिग्रेंट्स की कंपनी से बदले में पैसे मिलते थे.

कोसूरी को फर्जी धंधा करने के अपराध में लगभग 30 साल की सजा का सामना कर पड़ सकता था लेकिन जज लियोनी एम. ब्रिन्केमा ने कहा कि मामले की सुनवाई की पेचीदगियों के चलते सजा थोड़ी कम हो गई है.

कोसूरी के वकील स्टुअर्ट सियर्स ने कहा कि ये बहुत ही लंबा और असाधारण केस था. कोसूरी को उसके अपराध का एहसास और उसके परिवार ने इसकी कीमत भी चुकाई है.

कोसूरी 1999 में भारत से अमेरिका गया था और वो वहां कानूनी रूप से रह रहा था लेकिन उसने अपनी पत्नी को भी फर्जी वीजा के जरिए ही एंट्री करवाया था. सजा के बाद उसकी पत्नी स्मृति झरिया ने फर्जी तरीके से स्थानीयकरण लेने का अपराध कबूला और यूएस में जन्मे अपने बेटे को लेकर अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़कर भारत लौटने पर हामी भर दी.

बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एच-1बी वीजा पर बहुत कड़ा रुख है. वो इस प्रोग्राम को रद्द कर देने की भी बात कह चुके हैं.

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