छत्तीसगढ़

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 06 से 08 मार्च तक

खैरागढ़ – इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा 06 से 08 मार्च 2019 तक तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी आयोजित है। ‘मध्यकालीन हिन्दी कविता का अन्य ललित कलाओं से अन्तःसम्बन्ध’ विशयक इस संगोष्ठी का उद्घाटन 06 मार्च को मध्याह्न 3.30 बजे दरबार हाॅल में प्रो. (डाॅ.) माण्डवी सिंह की अध्यक्शता, प्रो. टी. वी. कट्टिमोनी, कुलपति इंदिरा गाँधी राश्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, अमरकंटक, अतिविशिश्ट अतिथि प्रो. प्रेमराज न्यौपाने, संस्कृत विश्वविद्यालय, काठमाण्डू (नेपाल) तथा प्रो. इन्द्रदेव तिवारी, अधिश्ठाता कला संकाय, इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के विशिश्ट आतिथ्य में सम्पन्न होगा।

इस शोध संगोष्ठी में प्रो. मुकेश गर्ग, पूर्व प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय बीज वक्तव्य देंगे। तीन दिवसीय यह अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी पाँच तकनीकी सत्रों में-मध्यकालीन हिन्दी कविता की पृश्ठभूमि स्वरूप एवं वैशिश्ट्य, पूर्वमध्यकालीन (भक्तिकालीन) हिन्दी कविता और संगीत, भक्तिकालीन हिन्दी कविता और चित्रकला आदि अन्य ललित कलाएँ, उŸारमध्यकालीन (रीतिकालीन) हिन्दी कविता और संगीत तथा रीतिकालीन हिन्दी कविता और चित्रकला आदि अन्य ललित कलाएँ उपशीर्शकों से सम्पन्न होगी। छठा सत्र खुला सत्र के रूप में सम्पन्न होगा।

संगोष्ठी का समापन 08 मार्च 2019 को सायं 4.30 बजे से प्रो. (डाॅ.) माण्डवी सिंह, कुलपति के मुख्य आतिथ्य, प्रो. चितरंजन कर भाशाविद् एवं साहित्यकार, रायपुर की अध्यक्शता में, डाॅ. आस्था शर्मा, मीडिया एग्जीक्यूटिव-टेलीविजन (माॅरिशस) के अति-विशिश्ट आतिथ्य में, प्रो. कमलकिशोर मिश्रा, कलकŸाा विश्वविद्यालय तथा प्रो. आई.डी. तिवारी अधिश्ठाता, कला संकाय के विशिश्ट आतिथ्य में सम्पन्न होगा।

उक्त संगोष्ठी में प्रो. धम्मिका जयसिंघे (श्रीलंका) प्रो. अमिता दŸाा (कलकŸाा), प्रो. किरन सरना (वनस्थली-राजस्थान), प्रो. महेश चम्पकलाल (बड़ौदा-गुजरात), डाॅ. प्रीति सागर (वर्धा-महाराश्ट्र), प्रो. बाँकेबिहारी शुक्ल (बिलासपुर), डाॅ. संतोश पाण्डेय (पुणे-महाराश्ट्र), डाॅ. परदेशीराम वर्मा (भिलाई), डाॅ. सुरेश चंद्र (उŸारकाशी-उŸाराखण्ड), डाॅ. संयुक्ता थोराट (नागपुर-महाराश्ट्र), प्रो. राजेश दुबे (रायपुर) एवं डाॅ. सुधीर शर्मा (भिलाई) तथा डाॅ. शंकरमुनि राय, डाॅ. चन्द्रकुमार जैन, डाॅ. बी.एन. जागृत (राजनाँदगाँव) विशय विशेशज्ञ के रूप में आमंत्रित हैं।

दिनांक 07 मार्च संध्या 6.00 बजे सांस्कृतिक संध्या के तहत् ‘फणीश्वरनाथ रेणु’ कृत कहानी का नाट्य मंचन तथा मध्यकालीन हिन्दी कवियों के छंदों का गायन एवं नृत्य प्रस्तुति होगी। कविता और ललित कलाएँ विशयक तीन दिवसीय इस अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में प्रदेश तथा देश के कई राज्यों के प्राध्यापक एवं शोधार्थीगण शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। संगोष्ठी प्रो. मृदुला शुक्ल, विभागाध्यक्श, हिन्दी के संयोजकत्व तथा प्रो. राजन यादव, डाॅ. देवमाईत मिंज के सह-संयोजन में सम्पन्न होगी।

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