EXCLUSIVE: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में घोटाले का खेल निराला,भ्रष्टाचार मिटाने सबूत को बाढ़ में बहा डाला

विश्वविद्यालय के पुराने आवश्यक दस्तावेजों को षड्यंत्रपूर्वक नष्ट करने की शिकायत,कुलपति पर आरोप

रायपुर: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में जहां घोटाले के गुब्बारे आकाश में उड़ रहे हैं ,तो वहीँ भ्रष्टाचार के साक्ष्य बाढ़ में बह रहे हैं .कृषि विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर बाढ़ सम्बंधित घोटाले का मामला सामने आया है .मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कारनामा भी ऐसा कि घोटालों का पर्दाफाश ना हो सके , इसलिए विश्वविद्यालय के पुराने आवश्यक दस्तावेजों को षड्यंत्रपूर्वक नष्ट कर दिया गया .शिकायतकर्ता ने बाकायदा दस्तावेजी साक्ष्य के साथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.एस .के. पाटिल और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं .

Indira-Gandhi-Agricultural-University-scam-corruption-raipur-1
Indira-Gandhi-Agricultural-University-scam-corruption-raipur-1

शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की शिकायत कुलाधिपति,मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ,विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ,कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे से की है .शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उचित जांच के साथ ही दोषियों पर सख्त कार्यवाही की मांग की है .शिकायतकर्ता आशीष कुमार शर्मा ने क्लिपर 28 से बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में घोटाले का अम्बार लगा हुआ है . कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के पाटिल नियमविरुद तरीके से मनमानी कर अपने पद के दुरूपयोग कर रहे हैं . कुलपति डॉ.पाटिल के द्वारा पद का दुरूपयोग करना आम बात हो गई है .नियमों को ताक में रखकर कुलपति सरकार के राजस्व को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं .

उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों पूर्व इंदिरा गाँधी कृषि विश्विद्यालय में आई बाढ़ में नियमों को ताकपर रखकर भारी भ्रष्टचार किया गया .विश्वविद्यालय में 30 जून 2007 को बाढ़ आई थी .इस दौरान हुए नुकसान के आंकलन हेतु 04 जुलाई 2007 को समिति का गठन किया था.इसके कुछ दिनों बाद ही 09 जुलाई 2007 को समिति ने बाढ़ से हुई क्षति के सम्बन्ध में अपनी रिपोर्ट सौंप दी. लेकिन अचानक करीब 5 साल 5 माह बाद कुलपति डॉ.पाटिल के आदेशानुसार कुलसचिव ने उसी बाढ़ के सम्बन्ध में फिर से समिति का गठन कर दिया .मामले में गठित समिति ने कुलसचिव कार्यालय से लगे हुए कन्या छात्रावास में स्थित 10 कमरों को कार्यालयीन उपयोग में होना बताया .जबकि इसके पूर्व की समिति ने अपनी रिपोर्ट में ऐसी कोई जानकारी नहीं दी थी .भ्रष्टाचार का खेल यहीं नहीं थमा . इसी बाढ़ में प्रशासन ने कुलपति के इशारों पर अपने पसंदीदा एवं चहेतों के ऐसे समस्त दस्तावेजों को नष्ट कर दिया ,जिन पसंदीदा अधिकारियों की नियुक्ति अवैधानिक थी .

आशीष शर्मा ने बताया कि बाढ़ की आड़ में विश्वविद्यालय के कई ऐसे अधिकारियों को लाभ पहुंचाया गया है ,जिनकी नियुक्ति नियम विपरीत थी . सरकारी दस्तावेजों को इस तरह से नष्ट होना बताया गया जैसे कि कोई मामूली खेल हो.यह घोर अपराध की श्रेणी में आता है .इस पूरे मामले में एक अन्य शख्स ने भी सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी .लेकिन उस शख्स के आवेदन पर जानकारी निरंक होना बताया गया. उक्त आदेश के विरूद्ध अपील भी की गयी .आशीष शर्मा ने प्रदेश की नयी कांग्रेस सरकार से उक्त पूरे मामले में उचित कार्यवाही कर न्याय की गुहार लगाई है .

Back to top button