रायपुर के रहने वाले 25 साल के इंद्रजीत घोष ने रूस में दिखाया अपना दम

इंद्रजीत स्काई डाइवर बनने का सपना पिछले कई सालों से बुन रहे थे

रायपुर:रायपुर के 25 वर्षीय इंद्रजीत घोष ने दो दर्जन से अधिक बार आसमान की बुलंदी को छुआ और फिर हवा से बातें करते हुए धरती की खूबसूरती निहारते हुए स्काई डाइविंग की दुनिया में अपना नाम बना लिया है। इंद्रजीत स्काई डाइवर बनने का सपना पिछले कई सालों से बुन रहे थे। आखिरकार उन्होंने अपने सपने को पूरा कर लिया।

सोवियत रूस के शिलोवो प्रांत में 14 हजार फीट ऊंचाई से 25 बार स्काई डाइविंग करके उन्होंने सभी को हैरान कर दिया। इसके लिए इंद्रजीत को यूनाइटेड स्टेट्स पैराशूट एसोसिएशन ने पेशेवर स्काई डाइवर के ए लाइसेंस से नवाजा है। ये लाइसेंस हासिल करने वाले इंद्रजीत रायपुर के संभवत: पहले व्यक्ति हैं। वे अब दुनिया में कहीं भी सोलो स्काई डाइविंग कर सकते हैं।

इंद्रजीत ने बताया, ‘मुझे 20 दिन का वीजा मिला था। 20 तारीख को रूस को रशिया के लिए उड़ान भरी। वहां भारतीय नौसेना, रशियन मिलिट्री और बेलारूस नेशनल टीम के पूर्व इंस्ट्रक्टर्स के डायरेक्शन में स्काई डाइविंग की ट्रेनिंग ली।’

इंद्रजीत ने बताया लाइसेंस के लिए 25 बार स्काई डाइविंग करना अनिवार्य है। वहां का मौसम खराब होने के कारण कुछ दिन स्काई डाइविंग का मौका नहीं मिल पाया था।

उन्होंने बताया कि दो दिन इमरजेंसी कंडीशन में थ्योरी क्लास में निकल गए। कम समय में टास्क पूरा करना था, इसलिए एक दिन में पांच से छह जंप भी किए। छह दिन में टास्क पूरा हुआ। पहली बार प्लेन का डोर खुलते ही जंप करने की बारी आई तो मेरा गला सूख गया था। हिम्मत हारने के बजाय लक्ष्य पर फोकस किया और कूद पड़ा।

इंद्रजीत पेशे से इंजीनियर हैं। वे डेढ़ साल से स्काई डाइविंग की तैयारी कर रहे थे। कोरोना के कारण जिम बंद थीं, इसलिए रोज रेसिडेंशियल सोसाइटी के कैंपस में रात 11 से 1 बजे तक एक्सरसाइज करते थे। पांच किमी वॉक, कार्डियो, हायपर एक्सटेंशन स्ट्रेचेस जैसी एक्सरसाइज से बॉडी मजबूत की।

स्काई डाइविंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्या करें और क्या नहीं, ये जानने पिछले तीन महीने से ऑनलाइन थ्योरी क्लास अटैंड कर रहे थे। इंद्रजीत के पिता रजत सुब्रत घोष और माता सोनाली घोष हैं।

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