आस्था विद्या मंदिर के छात्र-छात्राओें को सविंधान की दी गई जानकारी

दंतेवाड़ा :

जिले के एजुकेशन सिटी में स्थित आस्था विद्या मंदिर में भारतीय संविधान दिवस 26 नवम्बर को अधिकार रूप से मनाया गया। विद्यालय के सामाजिक विज्ञान विभाग के द्वारा भारतीय संविधान से सम्बन्धित कार्यक्रम किया गया।

विद्यालय के प्राचार्य संतोष प्रधान ने विद्यार्थियों को संविधान की मूल भावना और उद्देश्य को समझाने की दृष्टि से संविधान दिवस पर संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया।सामाजिक विज्ञान विभाग के शिक्षक चन्द्रमणि तावड़े, चैन सिंह, ईश्वरी प्रसाद नायक ने विद्यार्थियों को संविधान के निर्माण, नियम और भावनाओं के बारे में बताए। भारत के संविधान निर्माता के रूप में डॉ. भीमराव अम्बेडकर को जाना जाता है।

इन्होंने भारतीय संविधान के रूप में दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार किया है। यह दुनिया के सभी संविधानों को परखने के बाद बनाया गया। इसे विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है, जिसमें 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 94 संशोधन शामिल हैं।

यह हस्तलिखित संविधान है जिसमें 48 आर्टिकल हैं। इसे तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन का वक्त लगा था। 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा की तरफ से इसे अपनाया गया और 26 नवंबर 1950 को इसे लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया।

यह वजह है कि 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसके लिए 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करनेवाली समिति की स्थापना की गई थी ।

विद्यालय के शिक्षक व ईसीए मुख्य समन्वयक अमुजूरी विश्वनाथ ने बताया कि भारतीय संविधान पर केन्द्रित संगोष्ठी, वाद-विवाद प्रतियोगिता तथा निबंध प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम आयोजित किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्र-छात्राओें को संविधान के संबंध में जानकारी प्राप्त होगी और नई पीढ़ी संविधान की मूल भावना के अनुरूप स्वयं को ढाल सकेगी।

यही प्रेरणा समाज के सभी नागरिकों तक पहुंचेगी। इस कार्यक्रम में उप प्राचार्य प्रमोद गुप्ता, शिक्षक बिकाश बाईन, अशीम बेपारी, मिथलेश्वर जैन, शिरीष श्रीवास्तव, क्रिस्टोफर रोड्रिक्स, बुनिल साहू और कर्मचारियों ने सामाजिक भाव से हिस्सा लिए थे।

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