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नवोन्मेषी किसान बदल सकते हैं कृषि की तस्वीर

कृषि विश्वविद्यालय में नवोन्मेषी कृषक वैज्ञानिक कार्यशाला आयोजित

नवोन्मेषी किसान बदल सकते हैं कृषि की तस्वीर : डाॅ. पाटील

रायपुर, 27 नवंबर, 2019। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में आज यहां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली एवं क्षेत्रीय कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जबलपुर द्वारा दो दिवसीय नवोन्मेषी कृष वैज्ञानिक कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। शुभारंभ समारोह के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील थे।

विशिष्ट अतिथि के रूप में अटारी जबलपुर के निदेशक डाॅ. अनुपम मिश्रा, राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य डाॅ. डी.के. मरोठिया, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल सदस्य आनंद मिश्रा और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ. मंजीत सिंह उपस्थित थे। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रमुख वैज्ञानिक और नवोन्मेषी कृषक तथा मध्यप्रदेश के छिन्दवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मण्डला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रमुख वैज्ञानिक तथा नवोन्मेषी कृषक शामिल हुए। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी में नवोन्मेषी कृषकों द्वारा किये जा रहे नवाचारों को प्रदर्शित भी किया गया।

नवोन्मेषी किसान बदल सकते हैं कृषि की तस्वीर
कार्यशाला की शुरूआत करते हुए मुख्य अतिथि डाॅ. पाटील ने कहा कि किसान बड़े कृषि वैज्ञानिक होते हैं वे अपने खेतों पर नित-नये प्रयोग और नवोन्मेष करते हैं। इनमें से कई नवोन्मेष कृषि क्षेत्र के बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। किसानों द्वारा किये गए इन नवोन्मेषों को सामने लाने की जरूरत है और इस परिपेक्ष्य में इस कार्यशाला का आयोजन बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा विभिन्न जिलों में संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र ऐसे नवोन्मेषी किसानों के कार्याें को सामने ला रहे हैं और अन्य किसानों को नवोन्मेष करने के लिए पे्ररित कर रहे हैं।

उन्होंने ऐसे कई नवोन्मेषी किसानों के उदाहरण पेश किये। डाॅ. पाटील ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के एग्री बिजनेस सेन्टर द्वारा ऐसे नवोन्मेषी कृषकों को उद्यम स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। जब किसान खेती के साथ-साथ कृषि आधारित उद्यम भी स्थापित करेंगे तभी उनकी आर्थिक खुशहाली का रास्ता खुलेगा।

अटारी जबलपुर के निदेशक डाॅ. अनुपम मिश्रा ने इस अवसर पर कहा कि यह नवोन्मेषी कृषक कार्यशाला एक अभिनव पहल है जिसके माध्यम से किसानों के नवाचारों को सामने लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिकानेर की एक महिला कृषक केवल मशरूम की खेती से सालाना तीन करोड़ रूपये कमा रही है। इसी प्रकार उमरिया जिला का एक कृषक मुनगे की पत्तियों का पावडर खाड़ी देशों को निर्यात कर रहा है। उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किसानों को उद्यमी बनाने के प्रयास की सराहना की।

राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य एवं प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री डाॅ. डी.के. मरोठिया ने सुझाव दिया कि किसानों द्वारा किये जा रहे नवाचारों को उद्यम के रूप स्थापित करने और उन्हें व्यवसाय हेतु लायसेन्स दिलवाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया जाना चाहिए। कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल सदस्य श्री आनंद मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान अनेक नवाचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह नवाचार तभी सफल माने जाएंगे जब उत्पादन लागत कम हो और उत्पादकता में कमी न आए। उन्होंने कहा कि सफल नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए रायपुर में एक प्रदर्शनी लगाई जानी चाहिए।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ. मंजीत सिंह ने कार्यशाला की रूप-रेखा की जानकारी देते हुए बताया कि 24 सितम्बर, 2015 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में पहली कृषक नवोन्मेषी वैज्ञानिक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। तब से 24 सितम्बर को नवोन्मेषी कृषक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से इन नवोन्मेषों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज रायपुर में इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

इन नवोन्मेषी किसानों द्वारा किये गए नवाचारों का प्रसारण डी.डी. किसान चैनल पर धारवाहिक के रूप में किया जा चुका है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार डाॅ. एस.सी. मुखर्जी ने कार्यक्रम में प्रारंभ में स्वागत भाषण दिया एवं कार्यक्रम के अंत में अतिथियों के प्रति आभार प्रदर्शन डाॅ. अरूण त्रिपाठी द्वारा किया गया।

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