छत्तीसगढ़राज्य

प्रायमरी स्कूल के प्रश्नपत्र छपाई में सौ करोड़ से अधिक के घोटालें का आरोप ..एसआईटी से जाँच की मांग

कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष कन्हैया ने किया खुलासा

रायपुर : घोटालों की बाढ़ में प्रदेश के शिक्षा विभाग का एक और घोटाला सामने आया है.जिसमें प्रायमरी और अपर प्रायमरी (मिडिल स्कूल) के बच्चों के प्रश्न पत्रों की छपाई के नाम पर पांच साल में सौ करोड़ से ज्यादा का गोलमाल किया गया .

गोपनीयता के नाम पर हुए इस पूरे महाघोटाले में विभन्न प्रदेशों, नवोदय और केन्द्रीय विद्यालय जैसे संस्थानों के द्वारा कराये गये टेंडर कों दरकिनार कर सीधे संक्षिप्त निविदा से खरीदी कर घोटाले को अंजाम दिया गया है .कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ ने पूरे घोटाले को शिक्षा का महाघोटाला की संज्ञा देते हुए कहा, कि नन्हे बच्चों की शिक्षा के बजट का गबन करने वालों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज किये जाने के साथ ही प्रश्नपत्रों की खरीदी का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोकने आदेश जारी किया जाये .

उन्होने कहा, कि पूरे मामले की जांच के लिए एस. आई. टी. गठित की जाये. विभागीय जांच से घोटाले पर पर्दा ही डाला जायेगा .उन्होने कहा, कि मांमले की जांच , कार्रवाई और भुगतान रोकने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, मानव संसाधन मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव एवं सचिव शिक्षा विभाग को ज्ञापन भेजा जायेगा.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कन्हैया अग्रवाल ने शिक्षा विभाग में हुए उक्त घोटाले का खुलासा करते हुए कहा कि जो प्रश्नपत्र पांच से सात रूपये प्रति सैट में प्रकाशित कराये जा सकते थे उसे आठ से दस गुना अधिक दरों पर बगैर टेंडर जारी के प्रकाशित कराया गया . उन्होने बताया कि प्रदेश में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में लगभग 35 लाख विद्याथी परीक्षा में बैठते हैं जिसके लिए लगभग 14 करोड़ रूपये वार्षिक और 14 करोड़ रूपये अर्धवार्षिक परीक्षा हेतु प्रश्न पत्र के सैट खरीदी में खर्च किये जा रहे हैं .

जबकि उक्त कार्य टेंडर करके कराया जाये तो पांच से सात रूपये प्रति सैट की दर से 35 लाख सैट 4 से 5 करोड़ रूपये में खरीदा जा सकता है . इस तरह प्रतिवर्ष औसतन 20-22 करोड़ का घोटाला खुल्लम-खुल्ला किया गया .श्री अग्रवाल ने बताया कि मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, महाराष्ट्र, नवोदय विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय के साथ हर चीज में रोल मॉडल माने जाने वाले गुजरात ने भी पहली से आठवीं तक के प्रश्नपत्र खुले टेंडर के माध्यम से खरीदे ,परन्तु छत्तीसगढ़ ही अकेला राज्य रहा जिसने बच्चों की शिक्षा के नाम पर आये करोड़ों के बंदरबांट के लिए टेंडर को दरकिनार किया और सीमित निविदा के माध्यम से खरीदी की .

उन्होने कहा कि इस घोटाले में पूरा का पूरा महकमा शामिल रहा . शिक्षा मंत्रालय के पत्र 05 दिसंबर 2016 की कण्डिका 4.5 में स्पष्ट निर्देश है, कि अत्यंत गोपनीय कार्य होने के कारण सीमित निविदा से खरीदी की जाये . हास्यास्पद तो यह है, कि अत्यंत गोपनीय कार्य को कराने 27 जिलों के शिक्षा अधिकारियों को बुलाकर प्रश्नपत्र की 27 सी.डी. दी गई जिसकी कॉपी न जाने कितनी जगह हुई .

यहां उल्लेखनीय यह है, कि पहली से आठवीं तक के बच्चों को फेल नहीं किया जाता सिर्फ ग्रेड प्रदान किये जाते हैं, जिन कक्षाओं में फेल होने का संकट ही नहीं उसके प्रश्नपत्र लीक होने से बचाने का पूरा मामला ही घोटाले का सूचक है . 20 फरवरी 2018 को लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिलों के अधिकारियों को सी.डी. से ने प्रतिनिधि रायपुर भेजने पत्र जारी किया . ज्ञात हो, कि गोपनीयता के नाम पर करोड़ों डकारने वो अधिकारियों ने पिछले साल खुद की गलती से जशपुर में हुए पेपर लीक मामले को दफन किया था .

श्री अग्रवाल ने बताया, कि कक्षा 01 से कक्षा 02 में तीन विषय के प्रश्नपत्र होते हैं जिसमें प्रति प्रश्नपत्र लगभग 04 पेज का होता है, कक्षा 03 से कक्षा 05 में चार विषय तथा कक्षा 06 से कक्षा 08 में छः विषय होते हैं, जिनमें प्रति प्रश्नपत्र औरसतन 06 पेज होते हैं . उपरोक्त प्रश्नपत्रों के लिए हमने रायपुर के प्रतिष्ठित प्रिंटर्स से कोटेशन मंगाया तो प्रकाशन और ट्रांसपोर्टिंग मिलाकर औसतन 04 से 07 रूपये प्रति सैट की दरें आईं हैं . उन्होने कहा, कि जो काम अधिकतम डेढ़ रूपये प्रति विषय की दर पर हो सकता है उस काम को शिक्षा विभाग के घोटालेबाजों ने 30 से 50 रूपये तक की दरों पर करा लिया. इस तरह प्रतिवर्ष औसतन 20 से 22 करोड़ का बंदरबांट इस पूरी प्रक्रिया में करके 05 साल में लगभग 100 करोड़ से ज्यादा का घपला कर राज्य और केन्द्र से बच्चों की शिक्षा के लिए आये बजट को लूटा गया है .

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