बदले राज ठाकरे के सुर, उत्तर भारतीयों की महापंचायत में बोले- सबका सम्मान

नई दिल्ली।

उत्तर भारतीयों के विरोध की राजनीति करने वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे शनिवार को उत्तर भारतीय महापंचायत में पहुंचे. वहां उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं है. हिंदी बाकी भाषाओं की तरह सिर्फ भाषा है.

उत्तर भारतीयों के बीच राज ठाकरे ने अपने भाषण की शुरुआत मेरी भाईयों और बहनों से की. इसके बाद उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा अच्छी है. सच कड़वा होता है, लेकिन सही होता है. हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है. क्योंकि राष्ट्रभाषा का निर्माण कभी हुआ ही नहीं. जैसे हिंदी भाषा है, वैसे तमिल, मराठी, गुजराती भाषा है.

ठाकरे ने कहा कि देश को अपने संविधान और कानून के बारे में समझना चाहिए. अगर आप एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं तो पहले पुलिस थाने में जाकर जॉब के लिए सर्टिफिकेट लेना होता है. उन्होंने कहा कि मैं यहां पर यह साफ करने आया हूं कि अगर महाराष्ट्र में नौकरियां है तो उस पर पहला हक मराठियों का है. ठीक उसी तरह जैसे यूपी-बिहार में नौकरी होती तो पहला हक वहां के रहने वाले लोगों का होता.

मराठी न बोलने पर होने वाले विवाद पर राज ठाकरे ने कहा कि पहले आप जहां जाते हैं तो आपको वहां की भाषा सीखनी चाहिए. क्या आप विदेश में जाकर हिंदी में बात करते हैं. असम में बिहार के रहने वाले एक शख्स की हत्या की गई. वहां आंदोलन हुआ. गुजरात से यूपी-बिहार के लोगों को भगाया गया, लेकिन मीडिया को यह नहीं दिखाई दिया.

यूपी-बिहार के लोगों मिलने वाले कम तनख्वाह के सवाल पर ठाकरे ने कहा कि यह समस्या मराठियों के साथ भी है. कई लोग गैर-कानूनी तरीके से अपना व्यवसाय करते हैं. आपको यह खुद समझना पड़ेगा.

Back to top button