छत्तीसगढ़

बिलासपुर व दो अन्य ननि आयुक्त को निर्देश

अंकित मिंज

बिलासपुर।

सीजे अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की युगलपीठ ने दूषित जल से प्रदेश में हो रही ई-कोलाई और अनेक मौतों पर रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से 22 जनवरी को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

साथ ही रायपुर के साहूपारा में फै ल रहे पीलिया पर आयुक्त रायपुर को अलग से शपथपत्र में जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। रायपुर और दुर्ग में दूषित जल के सेवन से कई गर्भवती महिलाओं की मौत हो गई थी और अनेक लोगों को अस्पातल में भर्ती कराना पड़ा था।

रायपुर के नोवापारा में तो इलाका खाली कराने तक का आदेश हाईकोर्ट ने जारी कर दिया था। बाद में टैंकरों से पानी की आपूर्ति के आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने शासन को राहत दी थी। कोर्ट ने मामले की भयावहता को देखते हुए न्यायमित्रों की नियुक्ति कर रिपोर्ट देने को कहा। न्यायमित्रों ने बताया कि कई पाईप लाइन में जगह-जगह छेद होने के कारण पानी संक्रमित हो रहा है।

जांच में ई-कोलाई बैक्टिरिया की पुष्टि हुई। शासन ने सभी निगम आयुक्तों को पाइप लाइन दुरुस्त करने और पंप स्टेशनों पर कर्मचारियों की नियुक्ति समेत कई आदेश जारी किए। दुर्ग नगर निगम द्वारा निर्देश पर कई प्रकार के उपाय किए गए पर रायपुर और बिलासपुुर में समस्या बरकरार है।

रायपुर के मुकेश देवांगन ने गर्भवती पत्नी की मौत पीलिया से होने पर अधिवक्ता योगेश्वर शर्मा द्वारा याचिका दायर कर मुआवजा दिए जाने की मांग की है। याचिका में नगर निगम पर दूषित जल की आपूर्ति का आरोप लगाया गया है। सीजे की युगलपीठ ने सोमवार को इसी मामले की सुनवाई की।

डीजी जेल 14 वर्ष से कारावास में बंद कैदियों की जानकारी शपथपत्र में दें: सीजे की युगलपीठ ने महानिदेशक जेल को 14 वर्ष से अधिक अवधि से कारावास में बंद कैदियों की जानकारी शपथपत्र में देने के निर्देश दिए हैं।

मामले की आगामी सुनवाई 7 फरवरी को होगी। याचिकाकर्ता अमरनाथ पांडेय ने प्रदेश की कई जेलों में आजीवन कारावास या 14 वर्ष की सजा पूरी होने के बाद भी कैदियों की रिहाई नहीं किए जाने को लेकर जनहित याचिका लगाई है। याचिका में बताया गया है कि कई मामलों में कै दी की ओर से अधिवक्ता नहीं होने या मामले की सुनवाई समय पर नहीं होने के कारण सजा पूरी होने के बाद भी कैदियों की रिहाई नहीं हो पा रही है।

प्रदेश की सेंट्रल जेलों में ऐसे कैदियों की बहुतायत है, कोर्ट ऐसे मामले में दखल दे और कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करें। सीजे एके त्रिपाठी और जस्टिस पीपीसाहू की डबलबेंच ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस महानिदेशक जेल को ऐसे कैदियों की जानकारी मांगी है, जिनकी 14 वर्ष की सजा पूरी हो गई है।

साथ ही जिनका चाल-चलन कारावास के दौरान अच्छा रहा है और शासन ऐसे कैदियों की रिहाई के बारे में सोंच रही है। इसकी भी जानकारी कोर्ट ने मांगी है।

Summary
Review Date
Reviewed Item
बिलासपुर व दो अन्य ननि आयुक्त को निर्देश
Author Rating
51star1star1star1star1star
congress cg advertisement congress cg advertisement
Tags