बीदर लोकसभा सीट पर रोचक लड़ाई, बीजेपी ने इसको बनाया अपना उम्‍मीदवार

इस सीट से बीजेपी ने भगवंत खुबा को अपना उम्‍मीदवार बनाया

बीदर: लोकसभा चुनाव 2019 में कर्नाटक की बीदर लोकसभा सीट उन सीटों में से एक है जहां कांग्रेस और बीजेपी का प्रभाव बराबर का रहा है. शुरुआती दौर में यह सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी लेकिन बाद में बीजेपी ने कई बार इस सीट पर जीत दर्ज की.

इस सीट से बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद भगवंत खुबा को अपना उम्‍मीदवार बनाया है तो कांग्रेस ने उनके मुकाबले ईश्‍वर खांदरे को मैदान में उतारा है. वह कर्नाटक कांग्रेस कमेटी के वर्क‍िंग प्रेसीडेंट हैं. वह विधायक हैं. इस सीट पर मुकाबला इसलिए रोचक है क्‍योंकि दोनों ही उम्‍मीदवार लिंगायत समुदाय से आते हैं.

कर्नाटक की राजनीति में इस समुदाय का बहुत बोलबाला है. आमतौर पर इस समुदाय को बीजेपी समर्थक माना जाता है, लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार ने इसमें सेंध लगाने की कोशि‍श की थी. जब उसने लिंगायत समुदाय को अल्‍पसंख्‍यक बनाने का प्रस्‍ताव दिया था.

दस साल बाद बीजेपी ने छीनी थी सीट

2014 में इस सीट पर भगवंत खुबा ने कांग्रेस के धरम सिंह को हराया था. धरम सिंह कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं. ये सीट बीजेपी ने कांग्रेस से 2014 में दस साल बाद छीनी थी. हालांकि इस सीट पर बीजेपी का लंबे समय तक कब्‍जा रहा है.

1991 से बीजेपी ने जमा लिए थे अपने पैर

कर्नाटक में बीदर तेलंगाना और महाराष्‍ट्र के बॉर्डर पर स्‍थि‍त जिला है. इस सीट के इतिहास पर नजर डालें तो यहां पर 1991 से ही बीजेपी ने अपना कब्‍जा जमा लिया. इसके बाद 1991 से 2004 तक यहां पर बीजेपी के रामचंद्र वीरप्‍पा ही जीतते रहे. 2004 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के नरसिंह राव सूर्यवंशी ने जीत हासिल की. 2009 में धरम सिंह ने जीत हासिल की. 2014 में भगवंत खुबा ने धरम सिंह को हराकर इस सीट पर बीजेपी की वापसी कराई.

लिंगायत समुदाय को अल्‍पसंख्‍यक का मुद्दा नहीं

इन चुनावों में इस सीट पर लिंगायत समुदाय को अल्‍पसंख्‍यक का दर्जा दिया जाना मुद्दा नहीं बना है. बीजेपी सांसद खुबा कहते हैं कि इस चुनाव में राष्‍ट्रीय सुरक्षा ही सबसे बड़ा मुद्दा है. वह मानते हैं कि अब भी मोदी लहर है.

भगवंत खुबा ने 2014 से पहले तक कोई चुनाव नहीं लड़ा था. उनका परिवार रोड और रेलवे कॉन्‍ट्रेक्‍ट से जुड़ा था. वह खुद इंजीनियर हैं. 2014 में मोदी लहर में उन्‍होंने धरम सिंह को हराकर इस सीट पर बीजेपी की वापसी कराई. ईश्‍वर खांदरे भी इंजीनियर हैं. उनके पिता राज्‍य में मंत्री रह चुके हैं.

राज्‍य सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीदर कर्नाटक का सबसे पिछड़ा हुआ जिला है. इसे 2004 में मनरेगा के पायलट प्रोजेक्‍ट के लिए भी चुना गया था.

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