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25 साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है यह ‘आधा हिंदुस्तानी’ परिवार

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में एक परिवार ऐसा भी है जो पिछले 25 सालों से एक अलग ही लड़ाई लड़ रहा है. लड़ाई है ब्रिटिश नागरिकता की. दिल्ली में एक ऐसी ही मां रहती हैं जो पिछले 25 साल से अपने दो बच्चों के साथ ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने की लड़ाई लड़ रही हैं.

ये कहानी है एक ऐसे परिवार की जो आधा ब्रिटिश है और एक तरह से आधा हिंदुस्तानी. ये परिवार आधा हिंदू है और आधा क्रिश्चियन. ये कहानी है एक ऐसी मां कि जो अपने बच्चों को लंदन की शान-ओ-शौकत में पालना चाहती थी. जिसके दिल में तो हिंदुस्तान बसता है मगर आंखों में ख्वाब है लंदन शहर में बसने का. उनका नाम है मंजू मैथ्यु कार्टर. मंजू मैथ्यु कार्टर बीते 25 सालों से ब्रिटिश हाईकमीशन से नागरिकता हासिल करने की लड़ाई लड़ रही हैं.

मंजू खुद एक ब्रिटिश नागरिक हैं. मंजू कार्टर की शादी ब्रिटिश नागरिक मैथ्यु कार्टर से साल 1972 में हुई थी. मैथ्यु तब एक भारतीय कंपनी में काम करते थे. मैथ्यु की आखिरी इच्छा थी कि वे हमेशा हिंदुस्तान में ही रहें लेकिन बच्चों की शिक्षा इंग्लैंड में हो.

कानून ये कहता है कि अगर मां-बाप ब्रिटिश नागरिक हैं तो बच्चों को नागरिकता खुद-ब-खुद दी जानी चाहिए. लेकिन, 25 सालों से ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने की लड़ाई में परिवार ने करीब आधे दर्जन एप्लीकेशन दिए. हजारों रुपए की फीस भरी. लेकिन हर बार नए ऑब्जेक्शन लगाकर आवेदन वापस भेज दिए गए.

मारग्रेट कहती हैं कि यहां क्रिश्चियन होने के नाम पर भेदभाव होता है और ब्रिटिश हाईकमीशन से नागरिकता की अर्जी मंजूर नहीं होती.

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