घाटी में सुरक्षा बलों के लिए ‘सिरदर्द’ बना ISIS की बढ़ती घुसपैठ

2018 में राज्य में 170 से अधिक स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल

श्रीनगर: इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) की घाटी में तेजी से मौजूदगी बढ़ती जा रही है. इसकी जड़ें घाटी में मज़बूत करने की पूरी कोशिश की जा रही है.

ऐसे में जम्मू और कश्मीर में सुरक्षाबल अब ‘कट्टरपंथी’ युवाओं और उनके आकाओं की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं. ताकि उन्हें आतंकवाद की श्रेणी में शामिल होने से रोका जा सके.

पुलिस भी यह मानती है की घाटी में ऐसी विचारधार को फैलाने के लिए कुछ तत्व कोशिश में लगे हैं. लेकिन पुलिस नहीं मान रही है कि इस विचारधार से जुड़े आतंकी संगठन आईएसआईएस की पकड़ कश्मीर में मज़बूत है.

राज्य के डीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक, “कश्मीर में आईएसआईएस की मौजूदगी ज्यादा नहीं है. हालांकि युवाओं के एक वर्ग को इस विचाधारा के साथ जोड़ने की पूरी कोशिश हो रही है.”

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, “2018 में राज्य में 170 से अधिक स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हो गए. इनमें ज्यादातर युवा पढ़े-लिखे थे जो इंटरनेट के जरिए इस्लामिक स्टेट के प्रचार से प्रभावित होकर इस रस्ते पर निकल पड़े.

हालाँकि सुरक्षबलों ने कई आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद के साथ साथ इस विचारधारा का लिटरेचर भी बरामद किया है.

यही कारण है कि कश्मीर घाटी में स्थानीय आतंकवादियों के मारे जाने के बाद विरोध प्रदर्शन भड़क उठता है. यह भी सुरक्षा बलों के लिए ‘सिरदर्द’ बन गए हैं.”

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