Ips मुकेश गुप्ता व रजनीश सिंह पर कोर्ट के आदेश के तहत दर्जनभर धाराओं के तहत हुआ अपराध दर्ज, मचा हड़कंप

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

बिलासपुर/- प्रदेश के आईपीएस अफसर के खिलाफ पुलिस ने जुर्म दर्ज कर लिया है,हालांकि इसे पुलिस ने इसे गुप्त रखा है,लेकिन मामला काफी गंभीर है जिसकी वजह से यह जुर्म दर्ज किया गया है, सिविल लाइन पुलिस ने रविवार की शाम 120 बी, 166, 167, 213, 218, 380, 352, 420, 467, 468, 471 व 472 के तहत मामला दर्ज किया है,

इसकी जानकारी पुलिस विभाग के सिटीजन पोर्टल में है,इस एफआईआर के बाद से प्रदेश भर में खलबली मची हुई है। वही पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है और हर कोई अपने तरफ से नाम जोड़कर देख रहे है,फिलहाल यह मामला काफी सुर्खियों में है। इधर इस एफआईआर में तत्कालीन आईपीएस के खिलाफ जुर्म दर्ज होने से अन्य लोगो मे काफी खलबली मची हुई है।

मिली जानकारी के मुताबिक कथित तौर पर कूटरचित FIR तैयार करने और असत्य तथा अपूर्ण तथ्यों के साथ सर्च वारंट के आधार पर तलाशी लिए जाने के मसले पर पेश परिवाद पर CJM डमरुधर चौहान के आदेश पर धारा -120-B-IPC, 166-IPC, 167-IPC, 213-IPC, 218-IPC, 380-IPC, 382-IPC, 420-IPC, 467-IPC, 468-IPC, 471-IPC, 472-IPC के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना के निर्देश थाना सिविल साईंस थाने को दिए हैं..

कल देर शाम सिविल लाईंस थाने में अज्ञात के विरुद्ध क्राईम नंबर 0791/2020 कायम कर विवेचना शुरु कर दी गई है,पर जिस परिवाद पर जारी निर्देश पर यह मामला पंजीबद्ध किया गया है उसमें परिवादी पवन अग्रवाल हैं, जो कि जल संसाधन विभाग में पदस्थ रहे कार्यपालन अभियंता आलोक अग्रवाल के भाई हैं।

परिवाद में यह आरोप लगाया गया है कि,30 दिसंबर 2014 को ACB के अधिकारी विजय कटरे और आलोक जोशी पहुँचे और सर्च वारंट दिखाया,सर्च वारंट में FIR नंबर अंकित नही था,अधिकारीयों ने सर्च के दौरान आवेदन की निजी संपत्ति, स्व अर्जित आय और स्त्रीधन के आभूषण को जप्त किया और इसके लिए तत्कालीन ACB के मुखिया मुकेश गुप्ता और कप्तान रजनीश सिंह के मौखिक निर्देश का हवाला दिया,इस जप्ती का कोई पत्रक न्यायालय में पेश भी नही किया गया,वहीं यह सूचना भी प्राप्त हुई कि,जिस अपराध क्रमांक 56/14 के तहत सर्च किया गया, वैसी कोई FIR थाना ऐसीबी/ईओडब्लू में दर्ज नही है..

सीजेएम बिलासपुर ने इस परिवाद को पंजीबद्ध कर आदेश देते हुए लिखा है –

“परिवादी के द्वारा पुलिस अधीक्षक राज्य आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो से जाँच कराए जाने का निवेदन किया गया है,किंतु प्रस्तुत परिवाद में आर्थिक अपराध के अपराध किए जाने के संबंध में परिवाद में उल्लेख नही किया गया है, और ना ही ऐसा कोई दस्तावेज पेश किया गया है,ऐसी स्थिति में प्रस्तुत परिवाद की जाँच पुलिस अधीक्षक राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो रायपुर से कराये जाने की आवश्यकता दर्शित नही होती,बल्कि इस न्यायालय के सुनवाई क्षेत्राधिकार में स्थित थाना सिविल लाईंस से कराया जाना उचित प्रतीत होता है”

परिवाद पर अदालत के निर्देश पर थाना सिविल लाईंस ने अज्ञात के विरुद्ध धारा -120-B-IPC, 166-IPC, 167-IPC, 213-IPC, 218-IPC, 380-IPC, 382-IPC, 420-IPC, 467-IPC, 468-IPC, 471-IPC, 472-IPC के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है..

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