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ईरान ने अपने महत्वाकांक्षी चाबहार रेल प्रोजेक्ट से भारत को किया बाहर

चीन से 25 सालों के लिए 400 बिलियन डॉलर की रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर

दिल्ली: चार साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान भारत के साथ हस्ताक्षर किए गए महत्वाकांक्षी चाबहार रेल प्रोजेक्ट से ईरान ने भारत को अलग कर दिया है. साथ ही ईरान ने खुद ही इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की घोषणा की है.

चाबहार रेल प्रोजेक्ट के तहत चाबहार बंदरगाह से अफगानिस्तान की सीमा से सटे जाहेदान तक रेल लाइन बिछानी है. लेकिन अब ईरान ने इस रेल प्रोजेक्ट में भारत की ओर से हो रही देरी को वजह बताते हुए खुद के दम पर पूरा करने की घोषणा की है.

ईरान ने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब उसने चीन से 25 सालों के लिए 400 बिलियन डॉलर की रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए हैं.

पिछले सप्ताह ईरान के परिवहन और नगरीय विकास मंत्री मोहम्मद सलामी में 628 किमी लंबे चाबहार – जाहेदान तक रेल लाइन के लिए ट्रेक बिछाने के काम का उद्घाटन किया था. इस रेल लाइन को आने वाले समय में अफगानिस्तान के जरंज तक विस्तार दिए जाने की योजना है.

योजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना को मार्च 2022 तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई है, जिस पर करीबन 400 मिलियन डॉलर खर्च होेंगे. भारत की मदद के बिना ईरान इस परियोजना के लिए ईरानी राष्ट्रीय विकास कोष का इस्तेमाल करेगी.

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