छत्तीसगढ़

सिंचाई की सुविधा तो नहीं मिल रही पर अधिकारी हो रहे मालामाल

राज शार्दूल :

मामला भूमि संरक्षण विभाग का निर्माण कार्यो मे अनियमितता
कोंडागांव :

देश में किसान सुविधाओं को लेकर आंदोलन की राह पर हैं वहीं जिले में किसानों के लिए चल रही योजनाएं अधिकारियों के कमाई का जरिया बन चुकी है अधिकारियों की मनमानी के चलते कृषकों को सिंचाई हेतु कृषि विभाग के द्वारा चलाई जा रही हरित क्रांति योजना एवं ऐसे ही अन्य योजनाओं का बुरा हाल है।

कृषि विकास से संबद्ध
भूमि संरक्षण विभाग में किसानों को सिंचाई उपलब्ध कराने हेतु तालाब एवं स्टापडेम निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही हैं। विभाग के कुछ अधिकारियों के द्वारा निर्माण कार्यों मे अनियमितता बरतते हुए शासकीय राशि का दुरुपयोग किये जाने की शिकायत है

विभाग के द्वारा क्षेत्र में तालाब निर्माण ,भूमि समतलीकरण ,स्टॉप डेम एवं डबरी निर्माण के कार्यों में अनियमितता बरती गई है।एक आरटीआई कर्ता ने मामले की शिकायत ईओडब्ल्यू एवं लोकपाल से भी की है।

आरोप है कि वर्षों से जमे कुछ अधिकारियों के द्वारा ठेकेदारों की तरह कार्य किया जा रहा है। न कोई इंजीनियर न ही कोई जांच अधिकारी स्टीमेट से लेकर मूल्यांकन एवं कार्य पूणता प्रमाण पत्र तक सभी कार्य विभाग के सर्वेयर एवं सहायक संचालक ही करते हैं ।

लंबे समय से जमे सर्वेयर ठेकेदार की तरह कार्य कर रहे हैं । सर्वेयर खुद ही स्टीमेट तैयार करते हैं तत्पश्चात वे स्वयं ही कार्य की देखरेख भी करते हैं साथ ही उनके द्वारा किए गए कार्यों का स्वयं ही मूल्यांकन भी किया जाता है।

निविदा शर्तों का पालन नहीं

विभाग के अधिकारी स्टॉप डेम एवं तालाब निर्माण में मनमानी बरतते आ रहे हैं ।विभाग के द्वारा ना ही निविदा प्रक्रिया का पालन किया जाता है और ना ही भंडार क्रय नियम का ही पालन करते हैं।

नियमानुसार 50 हजार से अधिक की सामग्री क्रय करने पर निविदा बुलाया जाना है किंतु यहां 25 से 30 लाख का कार्य कराया जाता है ।बावजूद इसके कहीं पर भी निविदा के द्वारा मैटेरियल सप्लाई नहीं किया जाता ।

कुछ दलाल किस्म के लोग ही विभाग को मैटेरियल सप्लाई करते हैं ,जो कि विभाग में लंबे समय से दलाली का कार्य कर रहे हैं। कुछ अधिकारी जो यहां लंबे समय से पदस्थ हैं,

वह अब तक करोड़ों का कार्य करा चुके हैं स्टापडेम एवं चेक डैम की लागत राशि लगभग 25 से ₹30 लाख रुपए तक होती है । जहां शासन के द्वारा निधार्रित किसी भी नियम का पालन होता नहीं दिखाई दे रहा है।

हरित क्रांति योजना का बुरा हाल

किसानों को सिंचाई हेतु आसानी से जल उपलब्ध हो इसके लिए विभाग के द्वारा हरित क्रांति योजना के जरिए चेकडैम एवं स्टॉप डेम का निर्माण कराया जाता है । जिसके लिए लाभान्वित कृषकों की संख्या का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।,

नियमतः कृषक को ही चेकडैम या स्टॉप डेम के लिए आवेदन करना होता है किंतु विभाग के अधिकारियों के द्वारा कुछ किसानों का हस्ताक्षर करा कर औपचारिकता के लिए कागजात तैयार किया जाता है।

विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि वे स्टॉप डेम या चेकडैम अपनी ताकत से राजधानी से स्वीकृत कराकर लाते हैं ,जिस पर वहां कमीशन भी देनी पड़ती है।

कई स्टॉप डेम हो चुके हैं बेकार

निर्माण कार्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते सीमेंट की कम मात्रा डाला जाना एवं खराब क्वालिटी के गिट्टी का प्रयोग किए जाने से स्टॉप डेम एवं चेक डैम की हालत खराब हो चुके हैं ।अनेक जगहों पर जर्जर हालत में देखा जा सकता है ।

स्टॉप डेम में कहीं दरारें आ चुकी हैं तो कहीं आधा हिस्सा बह चुका है, कई चेकडैम में ऐसी स्थिति है कि वहां बंधान फूट चुका है जिससे पानी रुकता ही नहीं है चेक डैम की स्थितियों का जायजा लेने पर पता चला कि कई स्टाप डेम एवं चेकडेम की हालत ऐसी है कि वहाँ बारिश के मौसम में भी जलभराव नहीं हो पाता।

वन विभाग एवं आदिवासियों की भूमि पर अतिक्रमण

विभाग के अर्धिकारियों ने कहीं भोले भाले ग्रामीणों की खेतिहर भूमि पर तो कहीं किसी जंगल के जमीन को कब्जा करके चेकडैम का निर्माण किया है । ऐसी स्थिति कोरगांव के पटवारी पारा एवं केशकाल के बड़ेखौली मैं भी देखा गया।

कोरगांव में सर्वेयर रामटेके के द्वारा शासन के नियम कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण करते हुए तालाब निर्माण किया गया है जिसकी कोई उपयोगिता नहीं है। आसपास किसानों की कृषि भूमि भी नहीं है वहां लोग निस्तार के लिए भी नहीं जा सकते क्योंकि यह गांव से काफी दूर है ।

ग्रामीणों की मानें तो यह तालाब जंगल की जमीन पर कब्जा करके एक सर्वेयर ने अपने कमाई का जरिया बनाने के लिए बनाया है। यहां ग्रामीणों ने बताया कि किसी के द्वारा भी यहां तालाब निर्माण की मांग नहीं की गई थी।

इसके लिए वन विभाग ने भी अनुमति नहीं दिया था किंतु बाद में विभाग के एक सर्वेयर ने वन विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर गलत तरीके से बिना अनुमति वन भूमि के हिस्से पर अतिक्रमण करते हुए तालाब का निर्माण किया है ।

जेसीबी से मिट्टी की खुदाई कर एक तरफ बंधान बना दिया है ।जहाँ पिचिंग का कार्य नहीं होने से बंधान का काफी हिस्सा बारिश के चलते बह चुका है। यहां पानी का ठहराव नहीं होता गर्मी के सीजन तो सूखा रहता ही है, अभी भी वहां जलभराव नहीं है ।

गांव के प्रभु लाल ,घसिया राम जयलाल आदि ने बताया कि यहां अधिकारियों ने अपनी मर्जी से तालाब निर्माण कर दिया है।बिना किसी तकनीक के निर्माण कार्य करने से पानी का ठहराव नहीं होता ही ।

वह भूमि वन विभाग का है तथा उस पर काफी समय तक तालाब निर्माण को लेकर विवाद होता रहा ।अंततः जबरन वहां पर निर्माण कार्य किया गया।

इस संबंध में पूछे जाने पर वन विभाग के अधिकारियों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ा कि उनके समय का कार्य नहीं है । इसी तरह केशकाल के बड़ेखौली में कार्य में हिस्सेदारी एवं सिंचाई का प्रलोभन देकर सरपंच एवं उनके रिशतेदारों की पट्टे की भूमि पर तालाब निर्माण कर दिया गया है।

जहाँ जमीन कम पड़ने पर वन विभाग की जमीन भी हथिया लिया गया। गांव के सरपंच को एक स्टांप पेपर में हस्ताक्षर कराकर उनकी जमीन को वन भूमि के हिस्से से मिला कर तालाब का निर्माण कर दिया गया है।

बताया जाता है कि सरपंच का तालाब के समीप ही खेतिहर भूमि है जिससे उन्हें इसका लाभ मिलेगा। साथ ही निर्माण कार्य में भी उनकी ट्रैक्टर एवं अन्य वाहन लगी थी।

सर्वेयर एवं अन्य अधिकारियों ने कई जगह इसी तरीके से स्टॉप डेम का कार्य किया है। विभाग के सर्वेयर के द्वारा इस बात का भी ध्यान नहीं रखा गया की पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आदिवासी की जमीन पर तालाब निर्माण करना कानूनी रूप से भी उचित नहीं है ।

इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच को कार्य में भी लाभ कराने का प्रलोभन देकर वहां पर डैम का निर्माण किया गया है।

वनविभाग खमोश

जंगल के अंदर पत्थरों को काटकर नजदीक होने से उसे वही पिचिंग के कार्य में लगाया गया जिससे अच्छा खासा मुनाफा हुआ तथा उसे दूर दराज से लाया गया बताकर लंबा चौड़ा बिल बना कर विभाग में पेश कर अच्छी खासी रकम निकाल कर समायोजित किया गया ।

विभाग के द्वारा वन विभाग को चूना तो लगाया गया ही वही राजस्व की चोरी भी की गई है वन विभाग के जमीन से ही मुरम एवं मिटटी भी निकाला गया है।

इस संबंध में वन विभाग के द्वारा भी आंखें मूंदे रहना कई सवालों को जन्म देता है ।सवाल यह भी उठता है कि वन विभाग के अधिकारी स्वयं आंखें मूंदे हुए थे या भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने उनकी आंखों पर पट्टी बांध दिया था।

हरित क्रांति योजना का बुरा हाल

किसानों को सिंचाई हेतु आसानी से जल उपलब्ध हो इसके लिए विभाग के द्वारा हरित क्रांति योजना के जरिए चेकडैम एवं स्टॉप डेम का निर्माण कराया जाता है जिसके लिए कृषकों की संख्या का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।,

नियमतः कृषक को ही चेकडैम या स्टॉप डेम के लिए आवेदन करना होता है किंतु कुछ किसानों का हस्ताक्षर करा कर औपचारिकता के लिए कागजात तैयार किया जाता है।

विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि वे स्टॉप डेम या चेकडैम अपनी ताकत से राजधानी से स्वीकृत कराकर लाते हैं ,जिस पर वहां कमीशन भी देनी पड़ती है।

मामले की उच्च स्तरीय शिकायत

जिले के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने भूमि संरक्षण विभाग मे व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की शिकायत करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। मामले की शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं लोकपाल से भी की गई है।

शिकायत दर्ज की गई है- लोकपाल

लोकपाल अधिकारी बस्तर संभाग मो जफर हुसैन ने बताया कि उन्हें मामले की शिकायत मिली है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।जांच के पश्चात कड़ी कार्यवाही की अनुसंशा की जावेगी।

किसानों एवं वन विभाग ने आपत्ति दर्ज नहीं की थी-कृषि विभाग

इस मामले में कृषि विभाग कोण्डागांव उप संचालक बीके बिजनोरिया ने सफाई देते हुए कहा कि किसी भी किसान ने आपत्ति दर्ज नहीं की थी। वहीं वन विभाग की ओर से भी आपत्ति दर्ज नहीं किया गया। जिससे उन जगहों पर निर्माण कार्य कर दिया गया है।

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