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बांग्लादेश को भारत की वैक्सीन देने की घोषणा की वजह चीन तो नहीं?

पाँच महीने बाद अचानक ये ख़बर आई कि हर्षवर्धन श्रृंगला महामारी के बाद पहली बार कोई विदेश यात्रा करने जा रहे हैं.

ये साल बांग्लादेश और भारत संबंधों के लिए शायद एक ख़ास साल होता क्योंकि ये बांग्लादेश की आज़ादी के नायक शेख़ मुजीबुर्रहमान की जन्मशती का वर्ष है जिसे बांग्लादेश ने मुजीब वर्ष मनाने की तैयारी की हुई थी. बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में भारत का योगदान दोनों देशों के रिश्तों में एक भावुक अध्याय रहा है.

17 मार्च को, शेख़ मुजीब की जयंती के दिन ढाका के नेशनल परेड ग्राउंड में एक भव्य आयोजन होना था. जिन विदेशी नेताओं को आमंत्रित किया गया उनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे.

शेख़ मुजीब की बेटी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी न्यौता भेजा था, जो बांग्लादेश की संसद के एक विशेष सत्र को संबोधित करने वाले थे.
भारत कितना उत्सुक था इस आयोजन को लेकर, उसकी एक झलक इस बात से भी मिलती है कि भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की तैयारियों के लिए 2 मार्च को ही ढाका पहुँच गए थे.

लेकिन आयोजन के दसेक दिन पहले बांग्लादेश में कोरोना संक्रमण के तीन मामलों का पता चला और बांग्लादेश सरकार ने आयोजन को काफ़ी सीमित कर दिया. प्रधानमंत्री मोदी का दौरा भी टल गया.

पाँच महीने बाद अचानक ये ख़बर आई कि हर्षवर्धन श्रृंगला महामारी के बाद पहली बार कोई विदेश यात्रा करने जा रहे हैं. और वो देश बांग्लादेश था. वो ख़ुद बांग्लादेश में तीन साल तक भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं.

दो दिन के अपने दौरे के आख़िरी दिन बांग्लादेश के विदेश सचिव के साथ बैठक के बाद हर्षवर्धन श्रृंगला ने पत्रकारों से कहा, “मैं यहाँ इसलिए आया क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री को लगा कि कोविड दौर में हमारे बीच उतना संपर्क नहीं हो सका था, लेकिन हमारे रिश्ते जारी रहने चाहिए.”

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