क्या भारत अतिथि देवो भव: वाला देश है न?

क्या भारत अतिथि देवो भव: वाला देश है न?

जब किसी पश्चिमी देश से ये खबर आती है कि कोई भारतीय उपेक्षा या किसी हिंसा का शिकार हुआ है तो शायद हममें से सभी इसे भावनात्मक रूप से लेते हैं. हमें बुरा लगता है कि हमारे देश का कोई व्यक्ति दूर देश में किसी मुश्किल शिकार हो रहा है. कई बार गुस्सा भी आता है.

जरूरत है कि अब हमें उतना ही दुख अपने देश में विदेशी टूरिस्ट या नागरिकों के साथ होने वाली हिंसा पर भी हो. सामान्य तौर पर होता भी है. जब भी अपने देश में किसी टूरिस्ट या विदेशी के साथ मारपीट की घटना होती है बहुत से लोग इसका प्रतिकार भी करते हैं. लेकिन हर कुछ दिनों बाद ऐसा वाकया जरूर सामने आता है.

भारत में लोगों को आने का न्योता देते हिंदी सिनेमा के स्टार आमिर खान जब अतिथि देवो भव: बोलते हैं तो देश में व्यवहार सुधारने की ही बात करते हैं. एक ऐड में आमिर खान भारत में लोगों के इधर-उधर थूकने की आदत पर भी तंज करते दिखाई दिए थे. वो सारे तंज हम भारतीयों के व्यवहार सुधारने के लिए थे. व्यवहार काफी सुधरा भी है. लेकिन गुरुवार को आई एक खबर ने फिर से भारत की छवि खराब करने का काम किया है. फतेहपुर सिकरी में एक स्विस जोड़े को पत्थरों और डंडे से पीटा गया. दोनों बुरी तरह घायल हो गए.

घटना के बाद सोशल मीडिया से लेकर नेताओं तक की तीखी प्रतिक्रिया आई. सभी ने एक स्वर से इसकी आलोचना की.

इसलिए जरूरी है केंद्र और राज्य की सरकारें विदेशी सैलानियों के अलावा किसी भी दूसरे कारणों से रह रहे विदेशियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करें.

हालांकि फतेहपुरी सिकरी की घटना के बाद यूपी प्रशासन ने इसपर तेजी से कार्रवाई की है. लेकिन ये कार्रवाई कम डैमेज कंट्रोल ज्यादा लग रहा है. सीएम बनने के साथ ही अपनी कड़क प्रशासनिक छवि बनाने की कोशिशों में लगे योगी आदित्यनाथ गुरुवार को आगरा में ही थे. एक सीएम जो अपनी छवि मजबूत और गुंडा वरोधी बनाने की कोशिश कर रहा है उसके जिले में मौजूद रहते अगर अपराधियों के हौसले बुलंद हों तो सारे प्रयास निरर्थक लगने लगते हैं.

योगी आदित्यनाथ सवालों के घेरे में इसलिए हैं क्योंकि ये घटना यूपी में हुई है. लेकिन विदेशी नागरिकों के साथ हिंसा की खबरें देश के लगभग हर कोने में होती है. प्रशासनिक चुस्ती के अलावा आम नागरिकों को पूरी सतर्कता के साथ कोशिश करनी होगी हमारे देश में आया कोई भी मेहमान हमसे खुश होकर जाए. उसके साथ हुई कोई भी हिंसा या बदतमीजी हमें अपने साथ जोड़कर देखनी होगी तभी विदेशों में भारतीयों के साथ भेदभाव पर गर्व से कुछ कह पाएंगे.

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