उक्त मंत्री कहीं सीएम और नक्सलियों के बीच की कड़ी तो नहीं?-उपासने

मंत्री लखमा को बर्खास्त करने की मांग

रायपुर: झीरम हमले के प्रत्यक्षदर्शी तब के कांग्रेस नेता शिवनारायण द्विवेदी द्वारा अपनी जान को छत्तीसगढ़ के मंत्री से खतरा बताए जाने और मंत्री के नक्सलियों से सांठ-गांठ संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि भूपेश के नेतृत्व में कांग्रेस के नेताओं तक की के जान सुरक्षित नही है।

झीरम का सबूत जेब में लेकर घूमने वाले भूपेश

उन्होंने कहा कि झीरम का सबूत जेब में लेकर घूमने वाले भूपेश बघेल क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद लखमा के दबाव में अपनी जेब नही झाड़ पा रहे हैं। उपासने ने कहा कि सीएम भूपेश बघेल के उस पुराने बयान के संदर्भ में देखें तो सवाल पैदा होता है कि उक्त मंत्री कहीं सीएम और नक्सलियों के बीच की कड़ी तो नहीं हैं?

भाजपा प्रवक्ता उपासने ने कहा कि अगर ऐसा नहीं है तब देखना होगा कि जिम्मेदार कांग्रेस नेता रहे द्विवेदी द्वारा न्यायिक आयोग के समक्ष दिए गए बयान को भूपेश जी कितनी गंभीरता से लेते हैं।

इस बयान को इसी तरह की हरकतों का अपने प्रति पलटवार के तौर पर देखें भूपेश वे स्वयं गांधी जी के विचारों पर चलने का ढोंग करते हुए भाजपा नेताओं की छवि धूमिल करने के कुंचित प्रयास में 164 के बयान पर राजनीतिक प्रोपेगंडा करते आए हैं।

अपनी न्यायप्रियता का परिचय दें भूपेश

उपासने ने कहा कि समय-समय पर अपनी बदलापुर की मानसिकता स्पष्ट करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल न्यायिक आयोग के समक्ष शिवनारायण द्विवेदी द्वारा दिए गए बयान को गंभीरता से लेते हुए मंत्री से इस्तीफा मांगते हैं या बर्खास्त करते हैं। अपनी पार्टी के लोगों के लिए भी अपनी न्यायप्रियता का परिचय दें भूपेश।

भाजपा प्रवक्ता उपासने ने सवाल पूछा कि एक जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा मंत्री के खिलाफ जान को खतरा होने की बात कहने से प्रदेश का आम आदमी भी अपने आपको कितना सुरक्षित महसूस कर पाएगा, वैसे भी प्रदेश में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने मंत्री को तुरन्त बर्खास्त किए जाने की मांग के साथ झीरम के सबूत संबंधी अपने दावों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उपासने ने कहा कि अगर सीएम झीरम मामले का सबूत जांच एजेंसी और आयोग को नहीं देते हैं तो उन पर साक्ष्य छिपाने समेत अन्य सुसंगत मामलों में मुकदमा दर्ज होना चाहिए क्योंकि वे लगातार उस हमले का सबूत अपनी जेब में होने का दावा करते रहे हैं।

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