वास्तु

क्या वास्तु और विज्ञान के बीच कोई संबंध है,जानें

सूर्य की किरणों में हानिकारक किटाणुओं को नष्ट करने की शक्ति

क्यों कहते हैं घर बनाते समय वास्तु के नियमों का ध्यान रखना चाहिए? क्या वाकई वास्तु का प्रभाव होता है? क्या वास्तु और विज्ञान के बीच कोई संबंध है? ऐसे कई सवाल अक्सर हमारे मन में उठते हैं और हम इनका जवाब जानना चाहते हैं।

वास्तु का प्रभाव होता है या नहीं इस बारे में सबसे बेहतर जवाब हमारे अपने अनुभव ही दे सकते हैं। लेकिन वास्तु और विज्ञान के बीच क्या संबंध है यह अक्सर कई वास्तुविद बताते हैं।

‘संपूर्ण सायंटिफिक वास्तु’ के लेखक वास्तुगुरु कुलदीप सलूजा के अनुसार, वास्तु और विज्ञान के बीच ये संबंध हैं…

रखें ईशान कोण में पानी?

वास्तु कहता है कि घर में पानी का स्रोत ईशान कोण में होना चाहिए। ईशान कोण में स्थित पानी के स्रोत पर पड़नेवाली सूर्य की किरणें पानी में पैदा होनेवाले हानिकारक बैक्टीरिया और किटाणुओं को नष्ट करती हैं।

विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करता है कि सूर्य की किरणों में हानिकारक किटाणुओं को नष्ट करने की शक्ति होती है।

पूर्ण दिशा में पेड़ नहीं लगाने चाहिए

पूर्व दिशा में वृक्ष और बड़े पत्तोंवाले पेड़ लगाने से सुबह का प्रकाश घर में सही तरीके से नहीं आ पाता। वहीं विज्ञान कहता है कि घर में सूर्य की रौशनी और ताजी हवा आना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

अग्नेय कोण में रसोई घर

अग्नेय कोण में रसोईघर बनाने की सलाह के पीछे भी सूर्य की रोशनी, किरणों और हवा का प्रवाह ही है। लेकिन अग्नेय कोण में पानी के स्रोत के लिए मना किया जाता है, यह वास्तु का नियम है क्योंकि वास्तु इसे अग्नि का स्थान मानता है।

पूर्व दिशा में आंगन क्यों?

जबसे मानव सभ्यता है, तभी से वास्तु है। इसके साक्ष्य हमें कई संस्कृतियों में देखने को मिलते हैं। पूर्ण दिशा में घर में आंगन रखने की सलाह वास्तु देता है ताकि यह स्थान भारी न हो।

वहीं, विज्ञान कहता है ज्यादा समय तक घर में सूर्य की रौशनी, किरणें और ताजी हवा का आना घर के लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। इस कारण बीमारियों पर खर्च होनेवाले पैसे की बचत होती है।

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