सिंचाई की स्थिति और जिलावार आबंटित धनराशि और सिंचाई प्रतिशत पर एक श्वेत पत्र जारी करें

सरकार की ठगी ने किसानों को आत्महत्या करने पर विवश किया : कांग्रेस

रायपुर : राज्य में सिंचाई की स्थिति पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेन्द्र साहू, कांग्रेस विधायक दल के उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज मंडावी, विधायक अमरजीत भगत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि रमन सिंह सरकार और उसका विकास सिर्फ कागजों पर चल रहा है। बिलासपुर और सरगुजा संभाग की जो रिपोर्ट आज समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई है उससे स्पष्ट है कि रमन सिंह ने पिछले 15 वर्षों में विकास सिर्फ दस्तावेजों तक ही सीमित है।

जब भी जमीनी रिपोर्ट की बारी आती है तो कलई खुल जाती है। अगर दस्तावेज बताते हैं कि चार लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है और जमीनी हकीकत बताती है कि सिंचाई सिर्फ दो लाख हेक्टेयर में हो रही है तो यह विकास के दावों की कलई खोलता है। जिन नहरों में पानी बहना चाहिए वहां बच्चे क्रिकेट खेलते दिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ किसानों के नाम से ही जाना जाता रहा है। पूरी दुनिया में इसे धान का कटोरा कहा जाता था। छत्तीसगढ़ की 85 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आजीविका के लिये कृषि पर निर्भर है। लेकिन रमन सिंह सरकार की इस ठगी और धोखाधड़ी ने किसानों की वो दुर्दशा कर दी है कि वह आत्महत्या करने पर विवश हो गया है।

जब राज्य बना तो सबसे बड़ी चिंता थी कि इस राज्य में सिर्फ 21 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित है लेकिन आश्चर्य है कि पिछले 15 वर्षों में यह दोगुना तक नहीं हो पाया। कागजों में भी नहीं। सिंचाई को लेकर जो फर्जीवाड़ा किया गया है वह जाहिर है कि कमीशनखोरी के लिए किया गया है। इस मामले में छोटे कर्मचारियों और अफसरों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। मंत्री से भी जवाब तलब किया जाना चाहिए और उनको तत्काल मंत्रिमंडल से हटाना चाहिए। सुराज सिर्फ हेलिकॉप्टर से नहीं चलना चाहिए, हकीकत में भी दिखना चाहिए। यह सरकार किसानों का पानी लगातार उद्योगों को बेचती रही है। रोगदा बांध बेच दिया और पेंड्रावन बेचने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। कांग्रेस ने किसानों के साथ मिलकर यदि आंदोलन न छेड़ा होता तो पेंड्रावन भी बिक गया होता।

भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के हितों और राज्यहित के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इन्द्रावती के बाद महानदी के मामले में भी छत्तीसगढ़ के किसानों के हितों से समझौता किया है। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार ने न तो महानदी सिंचाई परियोजनाओं में स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ाने और न ही वितरण प्रणाली को समुचित रूप से विकसित करने पर कोई ध्यान दिया। कांग्रेस की सरकार के समय बने महानदी पर समोदा डायवर्सन का पानी बलौदाबाजार-भाठापारा जिले के टेल में लवन एरिया में पहुंचना था लेकिन 15 वर्ष बीत रहे है और आज तक समोदा से लवन क्षेत्र तक पानी पहुंचाने वाली नहर का निर्माण भी रमन सिंह की सरकार ने नहीं किया है।

ऐसी सरकार से महानदी के मामले में किसानों की हितरक्षा और छत्तीसगढ़ की हितरक्षा संभव ही नहीं है। महानदी के कैचमेंट एरिया का 86 प्रतिशत छत्तीसगढ़ में है लेकिन छत्तीसगढ़ महानदी का मात्र 3.5 प्रतिशत पानी का उपयोग कर पाता है और उड़ीसा 14 प्रतिशत पानी का उपयोग करता है और शेष 82 प्रतिशत पानी समुद्र में बह जाता है। इसके बावजूद केन्द्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद उड़ीसा सरकार जल प्राधिकरण का गठन कराने में सफल रही है। पूरे प्रदेश में और खासकर आदिवासी इलाकों में खेती और सिंचाई की भी घनघोर उपेक्षा हुई है। आज अगर राज्य में देखें नाराणयपुर में 0 प्रतिशत, दंतेवाड़ा में 0 प्रतिशत सिंचाई है, सुकमा में 1 प्रतिशत, जशपुर में 4 प्रतिशत, बस्तर में 4 प्रतिशत, कोण्डागांव में 5 प्रतिशत, बीजापुर में 5 प्रतिशत, कोरबा में 7 प्रतिशत बलरामपुर में 8 प्रतिशत, कोरिया में 8 प्रतिशत, सरगुजा में 10 प्रतिशत, सूरजपुर में 11 प्रतिशत, कांकेर में मात्र 15 प्रतिशत ही सिंचाई है।

इसका अर्थ सीधे-सीधे इन भारतीय जनता पार्टी के 15 सालों में आदिवासी जिलों को सिंचाई सुविधा से वंचित रखने की आदिवासियों के खिलाफ एक साजिश रची गई ताकि आदिवासियों की जमीने हड़पी जा सके। ये वही इलाके के जहां पर जमीन के नीचे कोयला है, लोहा है, बाक्साइट है, कोरंडम है, बहुमूल्य खनिज है। इस इलाके की खनिज संपदा को लूटने के लिए इन जिलों को हर तरीके के विकास से भाजपा ने वंचित रखा। सिंचाई प्रतिशत के जिलेवार आंकड़े इस बात की स्पष्ट रूप से जीताजागता प्रमाण हैं। और जब कलई खुल ही गई है। कांग्रेस मांग करती है कि सरकार तुरंत राज्य में सिंचाई की स्थिति और जिलावार आबंटित धनराशि और सिंचाई प्रतिशत पर एक श्वेत पत्र जारी करें।

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