छत्तीसगढ़

पुन्नी मेला में प्रस्तुति देना बड़े गर्व की बात – सुनील तिवारी

- दीपक वर्मा

राजिम माघी पुन्नी मेला में प्रस्तुति देने आए सुनील तिवारी वे विशेष बातचीत

राजिम। बाहरी कलाकारों की अपेक्षा स्थानीय कलाकारों को एक मंच देना छत्तीसगढ़ शासन की एक अच्छी पहल है। वहीं किसी भी स्थानीय कलाकार के लिए राजिम पुन्नी मेला के मंच पर प्रस्तुति देना बहुत गर्व की बात है। सरकार की इस पहल से अब कई ऐसे कलाकारों में भी उम्मीद की किरण जगी है जिन्हें पहले मौका नहीं मिल पाता था। छॉलीवुड के सुपरस्टार सुनील तिवारी ने पुन्नी मेला के मुख्यमंच पर अपनी प्रस्तुति देने के बाद उक्त बातें अपने अनुभव साझा करते हुए बताईं।

तिवारी ने बताया कि सालभर छोटे-बड़े मंचों पर प्रस्तुतियां देने के बाद भी ऐसा अनुभव नहीं होता जो यहां हो रहा है। उन्होंने बताया कि राजिम, शिवरीनारायण, भोरमदेव, सिरपुर जैसे बड़े मंचों में प्रस्तुति देना एक सुखद यात्रा का अनुभव कराता है। उन्होंने बताया कि हम एक कलाकार हैं और हमारे लिए कोई भी मंच छोटा बड़ा नहीं होता। कलाकार जब एक बार अपना बाना ओढ़ लेता है तो उनमें छोटे बड़े का भेद नहीं होता। राजिम के इस मंच पर अपनी प्रस्तुति देना हमारे लिए उत्साह का विषय है।

कर्मा नृत्य कर बनाया था वल्र्ड रिकार्ड
तिवारी ने बताया कि दिल्ली में आयोजित विश्व संस्कृति महोत्सव के आयोजन में उन्होंने 1200 पंथी नृत्य कलाकारों के साथ प्रस्तुति दी थी। इसके बाद उन्होंने सोमनी में हुए स्काउट कैंप (जम्बुरी) में कोरियोग्राफी 23 हजार छात्र-छात्राओं सहित हर वर्ग के लोगों के साथ कर्मा नृत्य की प्रस्तुति देकर वल्र्ड रिकार्ड बनाया था।

आज हम बॉलीवुड- हॉलीवुड के बराबर
तिवारी ने चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश में छत्तीसगढ़ी फिल्म के अनुसार एक्टिंग – म्यूजिक सीखने सहित सिनेमा का कोई विशेष संस्थान नहीं है। बावजूद इसके हमारे यहां की फिल्में उसी फार्मेट में रिलीज हो रही हैं जिसमें कि बॉलीवुड या हॉलीवुड की फिल्में होती है। इससे यह साफ जाहिर है कि इंडस्ट्री छोटा होने के बाद भी हम बड़े कार्य करने का माद्दा रखते हैं।

छोटे सिनेमा घर साबित होंगे जीवनदायिनी
उन्होंने बताया कि हम प्रत्येक वर्ष ढेरों फिल्में बनाते हैं लेकिन वे आमजनों तक सीधे तौर पर नहीं पहुंच पाते। खासकर की ब्लाक स्तर तक इनकी पहुंच नहीं हो पाती। यदि इस ओर पहल कर छोटे- छोटे सिनेमाघरों का निर्माण कर दिया जाए तो यह छत्तीसगढ़ फिल्म जगत के लिए जीवनदायिनी साबित होगा। उन्होंने कहा कि सिनेमा एक्ट का सरलीकरण होना चाहिए। सिनेमा के लिए शासन जमीन आबंटित करना शुरू करेगी तो छग फिल्म जगत में एक नयी रोशनी की किरण आयेगी।

कभी लुप्त नहीं होगी हमारी संस्कृति
तिवारी ने बताया कि उनके अंदर बचपन से नाचा, गम्मत, करमा, सुवा, पंथी, रिलो सहित अन्य छत्तीसगढ़ी कला को देखने से वह मेरे अंदर बस चुका है। आज प्रत्येक घर में हर एक युवा, कलाकार है। हर किसी के अंदर अपनी एक अलग कला है। इससे यह साफ दिखाई पड़ता है कि हमारी संस्कृति और यह लोककला कभी भी लुप्त नहीं हो सकती बल्कि मेरा यह मानना है कि सरकार की पहल से इसे और अच्छी ऊंचाई मिलेगी।

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