पूंजीपतियों के ठेकेदारी कर रही मोदी सरकार को हटाया जाना ज़रूरी है: प्रोफेसर रोहित

रायपुर। भारत के लिए लोग मंच द्वारा शनिवार दिनांक 13 अप्रैल बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर आनंद समाज वाचनालय, रायपुर में सार्वजानिक वित्तीय संस्थान एवं आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था विषय पर सेमिनार में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों, वित्तीय संस्थान के कर्मचारीयो तथा आम नागरिकों ने अपनी भागीदारी दर्ज की।

सेमिनार की अध्यक्षता यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियन के श्री सुशांत मुख़र्जी ने की। आल इंडिया इन्सुरंस एम्प्लाइज एसोसिएशन के सह-सचिव कामरेड बी.सान्याल ने अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि आजादी के बाद भारत के विकास की ऐतिहासिक आवश्यकताओं को पूरा करने के क्रम में सार्वजानिक क्षेत्रों की स्थापना की गयी थी। लेकिन आज सार्वजानिक क्षेत्रों के उपक्रमों व् उनके वित्तीय संस्थानों को कमज़ोर कर राष्ट्र की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर दिया गया है।

सेमिनार के मुख्य वक्ता जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी, नयी दिल्ली के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रोहित ने बैंकिंग संकट पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार नें नीतिगत निर्णय लेकर बैंकों को ऐसे क्षेत्रों में नैगम घरानों को ऋण देने हेतु बाध्य किया, जिन क्षेत्रों में लाभ-हानि के आकलन का बैंकों को कोई अनुभव ही नहीं था।

UPA सरकार से आरंभ हुई यह नीति NDA सरकार में अपने चरम पर पहुंची। इसके चलते बैंकों में हजारों करोड़ों रुपयों का NPA बन गया। इस NPA की वसूली सख्ती के साथ ऋणी कॉर्पोरेट घरानों से की जानी चाहिए और उनकी संपत्ति ज़ब्त होनी चाहिए, लेकिन मोदी सरकार राईट ऑफ करने, बजट में टैक्स बढ़ाने, रिज़र्व बैंक की सुरक्षित निधि को कम करने जैसे कदमो से बैंकों के घाटे की भरपाई करना चाहती है।

यह सीधे सीधे अमीरों एवं पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने व् आम जनता को लूटने वाली नीतियां है। बैंकिंग संकट में आम जनता की बचत को ही गंभीर खतरे में डाल दिया है।

प्रोफेसर रोहित ने कहा कि देश के सारे संकटों की जड़ मोदी संकट है। हर वर्ष दो करोड़ रोज़गार देने का वादा कर सत्ता में आई मोदी सरकार ने रोज़गार के आंकड़ों को छिपाया है और जीडीपी को मापने की प्रणाली ही अपने कार्यकाल में विकास दिखाने के लिए बदल डाली है।

GST और नोट्बंदी से अर्थव्यवस्था गहरे संकट में फंस गयी है। मुद्रा, उज्ज्वला योजना, सौभाग्य, आयुष्मान, जनधन जैसी योजनाओं का बस प्रचार ही है लेकिन यह बहुत लाभकारी नहीं है। इन ढेरों योजनाओं हेतु बजट में पर्याप्त फण्ड अबंदित नहीं किया गया है।

प्रोफेसर रोहित ने जोर देकर कहाँ कि मोदी सरकार पूंजीपतियों की ठेकेदारी कर रही है। आम जनता के पैसों को लूटने की खुली छूट नैगम घरानों को दे दी गयी है। आयुष्मान और फसल बीमा जैसी योजनाओं से निजी बीमा कंपनियों का मुनाफा बेतहाशा बढ़ गया है।

चुनावी बांड का 93% चंदा अकेले भाजपा को प्राप्त हो रहा है। स्पष्ट है चुनावी बांड के माध्यम से अमीर लोग अपने पक्ष में नीतियां बनाने हेतु लोबिंग कर रहे है। मोदी ने ऐसा माहौल बना दिया है कि इन नीतियों का विरोध करने वालों को राष्ट्रद्रोही घोषित कर दिया जाता है।

अतः आज केंद्र में सत्ता परिवर्तन कर देश के राजनीतिक माहौल में एक सकारात्मक तब्दीली के ज़रूरत है जिससे आर्थिक नीतियों को आम जनता के पक्ष में मोड़ने के संघर्ष को तेज़ किया जा सके। प्रोफेसर रोहित ने भारतीय जीवन बीमा निगम व् सार्वजनिक बैंकों के कर्मचारियों के यूनियन को निजीकरण के खिलाफ उनके द्वारा जारी लडाइयों के लिए बधाई दी।

उन्होंने कहाँ कि इन दोनों प्रमुख वित्तीय संस्थानों की यूनियनस के संघर्षों के कारण इनको निजीकृत किये जाने की सरकारी मंशा सफल नहीं हो पा रही है। अपने वक्तव्य की समाप्ति के पश्चात श्रोताओं द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी प्रोफेसर रोहित ने दिए|

सेमिनार का संचालन करते हुए भारत के लिए लोग मंच की रायपुर इकाई के संयोजक कामरेड धर्मराज महापात्र ने कहा कि जलियांवाला बाग़ नरसंहार की 100वीं वर्षगांठ एवं आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित इस सेमिनार में हमें संकल्प लेना चाहिए कि संविधान एवं आज़ादी की रक्षा हेतु केंद्र में जनपक्षीय वैकल्पिक आर्थिक नीतियों पर चलने वाली धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन करेंगे।

इस अवसर पर प्रख्यात कलाकार अरुण काठोठे की पोस्टर प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। रायपुर डिवीज़न इन्सुरंस एम्प्लाइज यूनियन के महासचिव कामरेड अतुल देशमुख द्वारा प्रस्तुत आभार प्रदर्शन के बाद कार्यक्रम अध्यक्ष श्री सुशांत मुख़र्जी ने सेमिनार समाप्ति की घोषणा की।

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