आज भारत आएंगे इटली के पीएम गेंतिलोनी, मोदी से करेंगे मुलाकात

इटली के प्रधानमंत्री पाओलो गेंतिलोनी आज भारत आएंगे और सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्विपक्षीय चर्चा होगी। इटली की कंपनियां भारत में न केवल निवेश बढ़ाने की इच्छुक हैं बल्कि भारत भी सहयोगी देश से मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत रक्षा तकनीक समेत अन्य में सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है।

प्रधानमंत्री पाओलो गेंतिलोनी के साथ इंटली एक प्रतिनिधि मंडल भी आ रहा है और माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच में चमड़ा, डिजाइनिंग, फूड सेक्टर, तकनीक आदि के क्षेत्र में द्विपक्षीय निवेश तथा व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमति बन सकती है।

भारतीय सैन्य बल इटालियन तकनीक से बने रक्षा साजो-सामान का इस्तेमाल करती रही हैं। इटली यूरोपीय देशों में पांचवा भारत का बड़ा साझीदार देश है। मौजूदा समय में इटली की 140 के करीब बड़ी कंपनी सक्रिय रूप से कारोबार कर रही हैं।

द्विपक्षी व्यापार के मामले में दोनों देशों के बीच फिलहाल कुछ शिथिलता बनी हुई है। 1991 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार करीब 694 यूरो का था। 2012 तक आते-आते यह 8.5 बिलियन यूरो के आंकड़ो को पार कर गया। 2012 से इसमें गिरावट आनी शुरू हुई।

केरल के दो भारतीय मछुआरों पर अकारण गोली चलाने और उनकी हत्या करने के जुर्म में भारतीय सुरक्षा बलों ने इटली के दो नौसैनिकों को गिरफ्तार कर लिया था। यह घटना 2012 में हुई थी। इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर काफी पड़ा था।

इटली की सरकार चाहती थी उनके नौसैनिकों को भारत छोड़ दे, लेकिन नई दिल्ली ने भारतीय कानून के अनुसार अपने रुख को दृढ़ बनाए रखा था। इससे दोनों देशों के बीच में रिश्ते तल्ख होते चले गए थे।

राजनीतिक, आर्थिक रिश्ते को मिलेगी मजबूती

प्रधानमंत्री पाओलो गेंतिलोनी की इस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। उनके साथ 15 सीईओ का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है। प्रधानमंत्री गेंतिलोनी अपनी यात्रा दौरान सीईओ सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। निर्धारितत कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री गेंतिलोनी रविवार 11.00 बजे नई दिल्ली आ जाएंगे।

सोमवार को राष्ट्रपति भवन में उनका आतिथ्य होगा और इसके बाद महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर जाएंगे। इसके बाद होटल ताज पैलेस में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से चर्चा होगी और फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय चर्चा तथा प्रनिधिमंडल स्तरीय विमर्श प्रस्तावित है।

ऐसा माना जा रहा है दोनों नेताओं के बीच चर्चा तथा आम सहमति के बाद दो-तीन समझौते तथा आपसी सहमति पत्र को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

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