NIA को बड़ी कामयाबी, दो आरोपियों का इकबालिया बयान

नई दिल्लीः एनआईए की कश्मीर में टेरर फंडिग मामले में बड़ी सफलता हासिल हुई है। एनआईए अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को घाटी में अातंक फैलाने के लिए पाकिस्तान से आने वाले पैसे को लेकर दो आरोपियों के इकबालिया बयान दर्ज किए गए।

एनआईए के अधिकारियों ने नाम नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज़ किए गए बयानों ने अलगाववादियों के खिलाफ मामले को मज़बूत कर दिया है जिन्होंने कथित तौर पर घाटी में पथराव करने वालों और अशांति फैलाने वालों तक पैसा पहुंचाया था।

अधिकारियों ने कहा कि एक शख्स को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं दूसरे को हिरासत में लिया गया है और बाद में सरकारी गवाह बनने की बात कहने के बाद उसे छोड़ दिया गया। एनआईए अधिकारियों के मुताबिक, पहले शख्स को इस साल 24 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने उसके घर पर छापा मारा था। उस शख्स ने एनआईए के अधिकारियों से संपर्क करके अपना इकबालिया बयान दर्ज़ कराने पर सहमति दे दी।

अधिकारियों ने कहा कि उसने इस बारे में विस्तृत ब्योरा दिया कि पाकिस्तान के आतंकी संगठनों और आईएसआई से पैसा घाटी के अलगाववादियों को कैसे भेजा जाता था। इकबालिया बयान दर्ज़ कराने वाला दूसरा शख्स पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का करीबी सहयोगी है।

इकबालिया बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज़ कराया जाता है। इसमें आरोपी इस बात की पुष्टि करता है कि वो जांच एजेंसी से किसी तरह के दबाव के बिना बयान दे रहा है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाती है और इस दौरान अदालत परिसर में कोई जांच अधिकारी मौजूद नहीं रहता। आरोपी के बाद में पलट जाने पर एजेंसी झूठी गवाही का मामला दर्ज़ कर सकती है।

एनआईए ने आतंकी गतिविधियों की कथित फंडिंग के मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। सूची में गिलानी का दामाद अल्ताफ अहमद शाह और जानामाना कारोबारी जहूर वटाली भी हैं। गिलानी के करीबी और कट्टरपंथी अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत के प्रवक्ता अयाज अकबर और पीर सैफुल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया है।

सूची में अन्य लोगों में नरमपंथी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस प्रवक्ता शाहिद-उल-इस्लाम, मेहराजुद्दीन कलवाल, नईम खान, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, फोटो-पत्रकार कामरान यूसूफ और जावेद अहमद भट हैं। इससे पहले एनआईए ने अलगाववादी नेताओं के खिलाफ 30 मई को मामला दर्ज़ कराया था।

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