पर्यूषण महापर्व के समापन पर जैन समाज ने निकाली शोभायात्रा

अपनी गलतियों के लिए की क्षमायाचना

मुंगेली: स्थानीय जैन मंदिर में शनिवार को पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के समापन अवसर पर अक्षयनिधि, विजय कशाय, समवशरण, मोक्ष तप आदि तपस्या के तपस्वियों केअनुमोदनार्थ भव्य शोभायात्रा का आयोजन एवं सामूहिक क्षमायाचना कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जैन साध्वी छत्तीसगढ़ रत्न शिरोमणी, महत्तरा पद विभूषिता श्री मनोहर की सुशिष्या प्रवर्तिनी श्री कीर्तिप्रभा, दर्शनप्रभा, ज्ञानप्रभा एवं चारित्रप्रभा की पावन निश्रा में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने आस-पास के अनेक स्थानों से श्रद्धालुगण शामिल हुए। शोभायात्रा के प्रारंभ में इंद्रध्वज, बैंड पार्टी, घुड़सवार, भगवान का रथ, सिर पर मंगल कलश धारण किए तपस्वीगण खुली जीप पर 11 उपवास के तपस्वी नीतेष कोटड़िया, पुरुषों एवं महिलाओं की टोली प्रभु का जयकारा करते हुए अनुशासित रुप से चल रहे थे। सबसे अंत में भगवान महावीर को गौशालक द्वारा दिए गए उपसर्ग की झांकी, दादागुरुदेव के साथ काला गोरा भैरव की झांकी के अतिरिक्त प्रोजेक्टर के माध्यम से कार्यक्रमों की झांकी प्रस्तुत की गई।

शोभायात्रा सदर बाजार जैन मंदिर से प्रारंभ होकर महावीर स्वामी चौक, गोलबाजार, परमेश्वरी चौक, परशुराम चौक, पुराना बस स्टैंड होते हुए पुन: जैन मंदिर पहुंचकर सम्पन्न हुई। यहां गुरुवर्याश्री के द्वारा मंगलाचरण के साथ ही सामूहिक क्षमापना एवं तपस्वी अभिनंदन समारोह प्रारंभ हुआ।

समारोह को मुंगेली जैन समाज के अध्यक्ष अनोपचंद बैद, साधुमार्गी जैन संघ मुंगेली के उपाध्यक्ष पन्नालाल कोटड़िया, दुर्ग जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानचंद कोठारी, पंडरिया जैन समाज के हरीष लोढ़ा, नपा उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन, धीरज पारख, मनोहर महिला मंडल की ओर से पारस चौरड़िया, युवा कार्यकर्ता संदीप लूनिया, खरतरगच्छ युवा परिषद के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य प्रसन्न चोपड़ा, जिन शासन गु्रप से कुशल लूनिया, अरिहंत कोठारी, सिद्धार्थ बैद, सुमतिनाथ सेवा समिति से अध्यक्ष महेन्द्र पारख, भारतीय जैन संघटना की अध्यक्ष संगीता कोटड़िया, राधेलाल लोढ़ा दुर्ग, मनोहर महिला मण्डल दुर्ग, श्रेयांस गोलछा ने संबोधित करते हुए क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अपनी गल्तियों के लिए क्षमायाचना की।

समारोह को संबोधित करते हुए साध्वीरत्ना दर्शनप्रभा ने मुंगेली में आयोजित कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्होंने सभी से चातुर्मास के शेष दिनों में साधना आराधना से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। साध्वी श्री ज्ञानप्रभा ने कविता के माध्यम से क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समय का बेहतरीन उपयोग करने की प्रेरणा दी। साध्वी श्री चारित्रप्रभा ने तप और क्षमापना का जैन धर्म में महत्व को समझाया। दुर्ग से श्रीसंघ लेकर आए पन्नालाल ज्ञानचंद कोठारी का अभिनंदन स्थानीय जैन समाज की ओर से अनोपचंद बैद, विमलचंद लूनिया, सुरेन्द्र पारख द्वारा किया गया। इस अवसर पर जैन समाज द्वारा 11 उपवास के तपस्वी नितेश कोटड़िया, 9 उपवास के तपस्वी अन्नू छाजेड़ सहित सभी तपस्वियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के सचिव नवरतन जैन ने किया।

इस अवसर पर रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, भिलाई, कवर्धा, पंडरिया, नवागढ़ आदि स्थानों से श्रद्धालुगण का आगमन हुआ। कार्यक्रम के बाद स्वधमीर्वात्सल्य का आयोजन किया गया जिसका लाभ अनोपचंद देवराज बैद परिवार ने प्राप्त किया। पूरे आयोजन की व्यवस्था में नवयुवकगण, महिलाएं एवं बालिकाएं सक्रिय रहीं।

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