नौ और मासूम बच्चियों का गुनहगार था जैनब का कातिल

पाकिस्तान की एक अदालत ने छह साल की बच्ची जैनब अंसारी के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में अभियुक्त इमरान अली को चार बार मौत की सजा देने का फैसला सुनाया है

पाकिस्तान की एक अदालत ने छह साल की बच्ची जैनब अंसारी के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में अभियुक्त इमरान अली को चार बार मौत की सजा देने का फैसला सुनाया है। इमरान अली को अपहरण, बलात्कार, हत्या, चरमपंथ के चार मामलों मौत की सजा और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के मामले में उम्र कैद सुनाई गई है। पंजाब प्रांत के प्रॉसीक्यूटर जनरल एहतेशाम कादिर ने बताया, “उनको अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के मामले में उम्र कैद के साथ दस लाख रूपये का जुर्माना लगाया गया है।” उन्होंने बताया, “बच्ची के शव को कूड़े के ढेर में छिपाने के लिए कोर्ट ने सात साल की सजा और दस साल रुपये का जुर्माना लगाया है।” इसी साल चार जनवरी को कुरान की क्लास के लिए जाते हुए जैनब अंसारी कसूर से गायब हो गई थी। जैनब को आखिरी बार एक सीसीटीवी फुटेज में एक अज्ञात व्यक्ति का हाथ पकड़ कर जाते हुए देखा गया। कुछ दिनों बाद उसका शव एक कचरे के ढेर से मिला।

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इसके बाद पाकिस्तान के कई शहरों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई जगहों पर हिंसा हुई। हिंसा में दो लोगों की जान गई और कई लोग घायल हुए। इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी ना होने के कारण पुलिस और अभियोजन पक्ष को जांच के लिए वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लेना पड़ा।

पाकिस्तान में मौजूद बीबीसी संवाददाता उमर दराज नंगियाना ने बीबीसी संवाददाता मानसी दाश को बताया कि “ना तो इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी थे और ना ही पुलिस को कोई सबूत मिले थे। इसीलिए उन्होंने इस पूरे मामले को वैज्ञानिक तरीके से सुलझाने का फैसला किया।”

वो बताते हैं, “पुलिस से डीएनए टेस्ट के आधार पर ही जांच को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इसके लिए एक हजार से अधिक लोगों के डीएनए के नमूने लिए गए और उनकी क्रॉस मैंचिंग की गई। “जब पुलिस 800 नमूनों की जांच कर चुकी थी, उन्हें इमरान अली नाम के व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली। बाद में इमरान को गिरफ्तार किया गया।” “इसके बाद डीएनए की जांच करने वाली लैबोरेटरी ने बताया कि इस बात की संभावना बहुत अधिक है कि पुलिस को जैनब की हत्या के मामले में जिस अभियुक्त की तलाश है वो इमरान अली ही है। पुलिस को पता चला कि अभियुक्त बीते दो सालों के दौरान हुए कुल आठ मामलों में अभियुक्त है।”

वो बताते हैं, “जब इमरान को गिरफ्तार कर पेश किया गया और रिमांड पर लिया गया। पूछताछ हुई तो इमरान ने कबूल किया कि उन्होंने कुल नौ बच्चियों का बलात्कार कर उनका कत्ल किया है।” उमर दराज कहते हैं, “चुंकि पुलिस कस्टडी में लिए गए बयान को अदालत में पेश नहीं किया जा सकता, इसीलिए अदालत में भी इमरान अली का बयान दर्ज कराया गया था। अदालत में भी इमरान अली ने बच्चियों की हत्या की बात को कबूल किया।”

“अदालत ने अपने फैसले में भी ये लिखा है कि ये डीएनए मैचिंग से मिले तथ्य वैज्ञानिक सबूत इतने पुख्ता थे कि केवल इनके आधार पर ही सजा का ऐलान किया जा सकता है।” “पहली दफा इमरान अली को रिमांड लेने के लिए पेश किया गया था तो अदालत में उसे मंजूर कर लिया था। रिमांड खत्म होने पर फिर से उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। उस वक्त पुलिस ने अदालत से गुजारिश का ये मामला कोट लखपत जेल में चलाया जाए इमरान अली को रखा गया था।”

“जैनब की हत्या के बाद पाकिस्तान के कई इलाकों में हिंसा हुई थी। इस वजह से सुरक्षा कारणों के मद्देनजर अदालत ने पुलिस की गुजारिश स्वीकार कर ली और मामला जेल के भीतर ही चलाया गया। गुरुवार को इस मामले में अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।”

उमर दराज कहते हैं, “लोगों में इस मामले को ले कर काफी गुस्सा था और लोगों की मांग थी कि जल्द से जल्द दोषी को सजा सुनाई जाए। शायद यही कारण था कि लाहौर हाईकोर्ट ने इसे सात दिन में इस मामले का फैसला देने का आदेश दिया था। लेकिन आम तौर पर दहशतगर्दी के मामलों में उन्हें सात दिन में खत्म होने की बात कानून में पहले ही है।”

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