जैतखाम इन दिनों अपनी खूबसूरती की वजह से नहीं बल्कि अव्यवस्थाओं की वजह से चर्चा में

योगेश केशरवानी:

गिरौदपुरी/बिलाईगढ़: बलौदाबाजार जिले के गिरौदपुरी धाम में बने दिल्ली के कुतुब मीनार से भी ऊंचा जैतखाम इन दिनों अपनी खूबसूरती की वजह से नहीं बल्कि वहां की अव्यवस्थाओं की वजह से चर्चा में है, आपको बता दें कि गिरौदपुरी धाम में बने इस खूबसूरत स्वेत जैतखाम की खूबसूरती को असमाजिक तत्वों के द्वारा अपशब्द लिखकर दागदार किया जा रहा है।

आपको बता दें कि जिले के इस खूबसूरत जैतखाम के दर्शन के लिए देश के महामहीम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में देश के गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जैसे देश के शीर्ष नेता यहां मत्था टेकने आ चुके हैं।

शांति, एकता, और भाईचारे का प्रतीक

धरती से नीले आसमान को चूमती 77 मीटर ऊंची शांति, एकता, और भाईचारे का प्रतीक है ये अदभुत खूबसूरत स्वेत जैतखाम, जो स्थित है बलौदाबाजार जिले के गिरौदपुरी धाम में, गिरौदपुरी धाम बाबा गुरुघासीदास जी की जन्मस्थली और कर्मस्थली रही है

जिन्होंने मनखे मनखे एक समान का संदेश देकर आपसी भाईचारे को बढ़ाया था, बाबा गुरुघसीदास जी को सतनामी समाज भगवान की तरह पूजता है और जैतखाम सतनामी समाज का प्रतीक माना जाता है जिसकी पूजा की जाती है।

दिल्ली के कुतुबमीनार से भी ऊंचा

गौरतलब हो कि जिले के गिरौदपुरी धाम में 51 करोड़ रुपयों की लागत से दिल्ली के कुतुबमीनार से भी ऊंचा जैतखाम बना है लेकिन लोकार्पण होने के महज 3 साल बाद ही अब भ्रष्टाचार का जिन बाहर निकल आया है और जैतखाम के सबसे ऊपरी माले से बारिश का पानी टपक रहा है।

इतना ही नहीं जैतखाम परिसर के अंदर और बाहर सुरक्षा के लिए सीसी टीवी कैमरा लगना था लेकिन प्रशासन के द्वारा सी सी टीवी कैमरे के बारे में झूठा बोर्ड टांगा गया है जबकि इस जैतखाम के भीतर कहीं भी सी सी टीवी कैमरा नहीं लगा है जो कि जांच का विषय है।

छत्तीसगढ़ की जनता की जनता के लिए दिल्ली के कुतुबमीनार से ऊंचा जैतखाम छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की घोषणा के बाद से ही एक सपना था और जब 2007 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और 18 दिसम्बर 2016 को इसका लोकार्पण हुआ तो छत्तीसगढ़ की जनता का मानो सपना साकार हो गया

लेकिन विडम्बना देखिये की इस जैतखाम में लिफ्ट की सुविधा होते हुए भी इसका उपयोग आम जनता नहीं कर सकती और इस लिफ्ट का उपयोग सिर्फ वीवीआईपी लोग कर सकते हैं जिसके चलते यहां उसने वाले बुजुर्ग श्रद्धालु जैतखाम की पूरी ऊंचाई तक चढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते और मन को मार कर आधी दूरी से लौट आते हैं।

इसी लिए यहां आने वाले श्रद्धालु प्रशासन से लिफ्ट की सुविधा आमजन के लिए प्रारंभ करने की मांग कर रहे हैं, अब देखने वाली बात होगी कि यहां की खूबसूरती को दागदार करने वाले और यहां की बदहाली पर कब तक सुधार हो पाता है।

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