जेटली ने लगाया गठबंधन सरकार पर सही जानकारी छुपाने का आरोप

जेटली ने बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के निर्णय से अवगत कराया

नई दिल्लीः

प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकारी बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों की सही जानकारी छुपाने का आरोप लगाया है ।

मोदी सरकार ने एनपीए की समस्या का समाधान किया है और इंसोल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आईबीसी) बैंकिंग इतिहास में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

जेटली ने बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय के संबंध में लिये गये निर्णय से अवगत कराते हुए कहा कि संप्रग सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2008 से 2014 के दौरान अप्रत्याशित तरीके से ऋण उठाव में बढोतरी हुई।

इससे पहले कुल ऋण 18 लाख करोड़ रुपये था जो वर्ष 2014 तक बढ़कर 55 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में ढाई लाख करोड़ रुपये का एनपीए होने का आंकड़ा दिया जा रहा था

लेकिन वर्ष 2015 में जब रिजर्व बैंक ने एनपीए की पड़ताल शुरू की तो पता चला कि यह राशि ढाई लाख करोड़ रुपये नहीं बल्कि साढे आठ लाख करोड़ रुपये थी।

जेटली ने कहा कि आईबीसी ने निर्णायक की भूमिका निभाया है और अब देश में ऋण लेने की नयी संस्कृति विकसित हुई है। अब ऋणदाता को कर्जदार के पीछे-पीछे भागने की जरूरत नहीं है, बल्कि कर्जदार खुद ऋण चुकाने के लिए बैंक के द्वार तक पहुंच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले बैंक और कर्जदार के रिश्ते खराब हो रहे थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। भारी एनपीए के कारण कई बैंक डूबने के कगार पर थे, लेकिन इसके लिए बैंकों द्वारा किये गये वित्तीय प्रावधानों और पिछले चार वर्षों में सरकार द्वारा किये गये निवेश से स्थिति पूरी तरह बदल गई है।

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