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जलझूलनी एकादशी: व्रत के प्रताप से मिलेगा तीनों लोकों को पूजने का फल

राजस्थान में जलझूलनी एकादशी को कहा जाता है 'डोलग्यारस एकादशी'

20 सितंबर को यानि आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे पद्मा एकादशी अथवा जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।

मान्यता है कि आज के दिन पहली बार माता यशोदा ने अपने बाल गोपाल श्री कृष्ण के वस्त्र धोए थे इसलिए इस एकाद्शी को “जलझूलनी एकादशी” भी कहा जाता है।

राजस्थान में जलझूलनी एकादशी को ‘डोलग्यारस एकादशी’ भी कहा जाता है।

आज के शुभ दिन पर भगवान के वामन अवतार का व्रत व पूजन किया जाता है। इस व्रत में धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्प आदि से पूजा करने का विधि-विधान है।

आज के दिन जो जातक भगवान कमलनयन का कमल के फूलों द्वारा पूजन करता है उसे जगत पिता ब्रह्मा, श्री विष्णु सहित तीनों लोकों को पूजने का फल मिलता है।

आप घर में जिस स्थान पर रुपए या आभूषण रखते हैं, वहां पर भी घी का दीया जलाएं।

आज के दिन लक्ष्मी जी का पूजन करना भी विशेष फलदाई होता है।

मां लक्ष्मी अपने पति भगवान श्री विष्णु के बिना कहीं नहीं रहतीं इसलिए दोनों का चित्र अथवा प्रतिमा साथ में रखें।

इस दिन देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने के बाद भक्त को कभी धन की कमी नहीं होती। भगवती महालक्ष्मी चल एवं अचल संपत्ति देने वाली हैं।

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