कश्मीर में पहली बार शहीद हुए 2 गरुड़ कमांडो

श्रीनगर:  उत्तरी कश्मीर में बांदीपुरा के हाजिन इलाके में बुधवार को मुठभेड़ में वायुसेना के दो गरुड़ कमांडो शहीद हो गए। ऐसा पहली बार हुआ है कश्मीर में गरुड़ कमांडो को आतंकी मुठभेड़ में अपनी जान गंवानी पड़ी हो।

चंडीगढ़ में जब शहीद सार्जंट मिलिंद किशोर और कॉरपोरल नीलेश कुमार को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई तो हर किसी की आंखें भर आईं।

वायुसेना के कमांडो दस्ते के गरुड़ के कई सदस्य इस समय कश्मीर में थलसेना की विभिन्न टुकड़ियों के साथ आतंकरोधी अभियानों के संचालन का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

गरुड़ कमांडोज की ट्रेनिंग नेवी के मार्कोस और आर्मी के पैरा कमांडोज की तर्ज पर ही होती है। इन्हें एयरबॉर्न ऑपरेशंस, एयरफील्ड सीजर और काउंटर टेररेजम का जिम्मा उठाने के लिए ट्रेन किया जाता है।

2004 में स्थापना

2001 में जम्मू-कश्मीर में एयर बेस पर आतंकियों के हमले के बाद वायु सेना को एक विशेष फोर्स की जरूरत महसूस हुई। इसके बाद 2004 में एयरफोर्स ने अपने एयर बेस की सुरक्षा के लिए गरुड़ कमांडों फोर्स की स्थापना की।

सीधे स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग

आर्मी और नेवी से अलग, गरुड़ कमांडो वॉलनटिअर नहीं होते। उन्हें सीधे स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग के लिए भर्ती किया जाता है। और एक बार गार्ड फोर्स जॉइन करने के बाद कमांडो अपने पूरे करियर के लिए यूनिट के साथ रहते हैं। इस वजह से यूनिट के पास लंबे समय के लिए बेस्ट सोल्जर रहते हैं।

52 हफ्तों का कड़ी प्रशिक्षण

गरुड़ कमांडो के लिए काफी कड़ी ट्रेनिग होती है। यह 52 हफ्तों की स्पेशल ट्रेनिंग है, जिसमें सभी रिक्रूट्स को शामिल होना अनिवार्य होता है।

इंडियन स्पेशल फोर्सेज में इतनी लंबी ट्रेनिंग और किसी भी फोर्स की नहीं होती। यही वजह है कि ये कमांडों अपना विशेष स्थान रखते हैं।

एनएसजी के साथ भी ट्रेनिंग 

गरुड़ कमांडो की ट्रेनिंग देश के सबसे स्पेशल कमांडो नैशनल सिक्यॉरिटी गार्ड्स (एनएसजी) के साथ भी होती है।

इसके अलावा इन्हें स्पेशल फ्रंटियर फोर्स और इंडियन आर्मी के साथ भी प्रशिक्षित किया जाता है। इस चरण में सफल होने के बाद ही ये कमांडो आगे भेजे जाते हैं।

हर जंग के लिए तैयार 

गरुड़ कमांडोज को काउंटर-इन्सर्जन्सी ऑपरेशंस की ट्रेनिंग भी दी जाती है। इसके लिए इन्हें मिजोरम में काउंटर इन्सर्जन्सी ऐंड जंगल वारफेयर स्कूल (सीआईजेडब्लूएस) में प्रशिक्षित किया जाता है।

इसके अलावा गरुड़ कमांडो को हर तरह से युद्ध के लिए तैयार बनाने के लिए ट्रेनिंग के अंतिम दौर में इन्हें भारतीय सेना के पैरा कमांडोज की सक्रिय यूनिट्स के साथ फर्स्ट हैंड ऑपरेशनल एक्सपीरियंस के लिए भी अटैच किया जाता है। जहां वे अन्य बारीकियों को सीखते हैं।

दुनिया के खतरनाक हथियारों से लैस 

भारतीय वायुसेना के गरुड़ कमांडो को दुनिया की कुछ सबसे खतरनाक हथियारों से लैस किया गया है। इनके पास जहां साइड आर्म्स के तौर पर Tavor टीएआर -21 असॉल्ट राइफल होता है वहीं ग्लॉक 17 और 19 पिस्टल भी दिए जाते हैं।

इसके अलावा क्लोज क्वॉर्टर बैटल के लिए हेक्लर ऐंड कॉच MP5 सब मशीनगन, AKM असॉल्ट राइफल, एके-47 और शक्तिशाली कोल्ट एम-4 कार्बाइन भी इन्हें दी जाती है।

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