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छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक गांव को गोद लेकर भूल गये राहुल गांधी

बस्तर: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दो दिनों के लिये छत्तीसगढ़ के बस्तर आए, पार्टी नेताओं से मुलाकात की लेकिन एक गांव जो उनका इंतज़ार दस सालों से कर रहा है, वहां जाने की फुर्सत उन्हें नहीं मिली. बस्तर जिले का जामावाड़ा को राहुल ने अक्टूबर 2008 में अनौपचारिक तरीके से गोद लिया था क्योंकि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत उन्हें रायबरेली में जगदीशपुर को गोद लिया है. बस्तर के जामावाड़ा ने राहुल के वायदे पर यकीन किया क्योंकि उन्होंने कहा था कि वो गांव के हर सुख-दुख में साझीदार होंगे, लेकिन आज भी गांव में पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत है.

10 साल पहले राहुल गांधी ने श्रीनाथ के घर आधा घंटा बिताया था. सोमनाथ के घर पर भी राहुल आए थे और वायदा किया कि उनके कच्चे घर की जगह पक्का मकान बनवा कर देंगे, लेकिन हुआ कुछ नहीं. श्रीनाथ का कहना है, ‘वो बोले रोड बनाऊंगा, घर बनाऊंगा लेकिन कुछ नहीं हुआ.’ गडरु नाग का कहना था कि राहुल गांधी बोले थे, जामावाड़ा को गोद ले रहा हूं, लेकिन यहां कोई काम नहीं हुआ रोड, बिजली, पानी कोई काम नहीं हुआ.

4500 की आबादी वाले इस गांव के 4 वॉर्डों में सिर्फ खंबे लटके हैं, बिजली नहीं है. 10 साल पहले 710 लोग गरीबी रेखा से नीचे थे, अब 1070 हैं. गांव में सिर्फ 10 लोग सरकारी नौकरी में हैं, 500 शहर में मज़दूरी करते हैं, स्वरोजगार योजना का फायदा सिर्फ 4 लोगों को मिला है. दस साल में सिर्फ 200 बीपीएल परिवारों को आवास योजना का लाभ मिला है.

गांव के सरपंच सोमनाथ ने कहा ये मेरा चौथा कार्यकाल है, राहुल गांधी आए थे, ये उनका गोदग्राम है, हमने पेपर में पढ़ा. लेकिन गांव का जो भी विकास हुआ है सिर्फ पंचायत निधि से गोदग्राम के नाते वहां से कुछ काम नहीं हुआ है.

जामावाड़ा के प्राइमरी स्कूल के बच्चों ने राहुल को नहीं देखा, लेकिन स्कूल को कायापलट की उम्मीद थी. ये सही है कि राहुल गांधी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत जामावाड़ा को गोद नहीं लिया था फिर भी गांववालों को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं, जो अब नाउम्मीदी में तब्दील हो रही हैं.

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