अंतर्राष्ट्रीय

चंद्रमा पर मिली 50 किमी लंबी गुफा, बन सकती है चांद पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट का सुरक्षित आसरा

जापान के वैज्ञानिकों को चंद्रमा पर एक बहुत बडी़ गुफा का पता चला है। गुरुवार (19 अक्टूबर) को वैज्ञानिकों ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस गुफा में चंद्रमा पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट रह सकते हैं जिससे वो खतरनाक विकिरण और तापमान में अप्रत्यातिस बदलाव से बच सकें।

जापान के एईएईएनई लूनर आर्बिटर से मिले आंकड़ों के अनुसार चंद्रमा पर मौजूद ये गुफा 3.5 अरब साल पहले भूगर्भ के अंदर हुई हलचल के वजह से बनी होगी। इस गुफा की लम्बाई 50 किलोमीटर और चौड़ाई 100 मीटर है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ये गुफा भूगर्भ से निकले लावे की वजह से तैयार हुई होगी। जापानी वैज्ञानिकों ने ये आंकड़े और नतीजे अमेरिकी पत्रिका जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित कराए हैं।

जापानी वैज्ञानिक जुनिची हारुयामा ने गुरुवार को कहा, “हमें अभी तक ऐसी चीज के बारे में पता था और माना जाता था कि ये लावा ट्यूब हैं…लेकिन उनकी मौजूदगी की पुष्टि अब से पहले नहीं हुई थी।” जमीन के अंदर मौजूद ये गुफा चंद्रमा के मारियस हिल्स नामक जगह के पास स्थित है। जापानी वैज्ञानिक ने कहा कि इस गुफा में रह कर अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा प्रवास के दौरान विकिरण और तापमान में होने वाले तेज बदलावों के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं। जापान ने इसी साल जून में साल 2030 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष मिशन भेजने की घोषणा की।

चीन और भारत भी अपने-अपने अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं। चंद्रमा पर सबसे पहले 20 जुलाई 1969 को मनुष्य ने कदम रखे। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रीन अंतरिक्ष विमान अपोलो 11 में सवार होकर चांद पर पहुंचे थे। नासा साल 2030 तक मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यात्री भेजने की तैयारी कर रहा है।

Summary
Review Date
Reviewed Item
चंद्रमा
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.