छत्तीसगढ़

जापानी सीड बॉल तकनीक राजनांदगांव पहुचीं

बीजों को पोषाहार मिलने से फलने-फूलने का बेहतर वातावरण तैयार होगा

राजनांदगांव : जापान के प्राकृतिक कृषि विज्ञानी मसानोबु फुकुओका द्वारा बीज के उचित पोषण के लिए तैयार की गई सीड बॉल तकनीक अब राजनांदगांव भी पहुँच गई है। लोक सुराज के समाधान शिविर खैरा से इसकी शुरुआत हुई। खैरा क्लस्टर में बिहान के स्वसहायता समूह के लोगों ने एक लाख सीड बॉल तैयार किए हैं। पूरे ब्लाक में 11 समाधान शिविर होने हैं।

सभी में एक लाख सीड बॉल बनाए जाएंगे। इस प्रकार बरसात से पूर्व 11 लाख सीड बॉल तैयार हो जाएंगे। बरसात से पूर्व इन्हें रोप दिया जाएगा जिससे बीज को उचित पोषण का वातावरण मिलेगा। जापान की इस सीड बॉल तकनीक को यहाँ विशुद्ध भारतीय नाम बीज पुंसवन दिया गया है।

पुंसवन भारतीय परंपरा में उन सोलह संस्कारों में दूसरा संस्कार है जिसके माध्यम से गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ होने की कामना के लिए अनुष्ठान किया जाता है। बीज पुंसवन भी इसी तरह का अनुष्ठान है। इसमें गोबर और गोमूत्र की बॉल तैयार की जाती है जिसके भीतर बीज डाल दिया जाता है और इसे सूखने छोड़ दिया जाता है।

बरसात से ठीक पहले पौध रोपण के समय इसे छोड़ दिया जाता है। जब मिट्टी नम हो जाती है तब बीज को पोषण के लिए पर्याप्त आहार आसपास ही मिल जाता है। इस संबंध में जानकारी देते हुए जनपद पंचायत सीईओ शिशिर शर्मा ने बताया कि बीजों को पोषाहार मिलने से इनके लिए फलने-फूलने का बेहतर वातावरण तैयार होता है।

बरसात से पूर्व इन्हें ऐसे स्थलों पर छोड़ा जाएगा जहाँ इनके फलने-फूलने एवं देखरेख के लिए भी बेहतर वातावरण मिल सके। उल्लेखनीय है कि पूरी तरह सूख जाने के कारण सीड बॉल के भीतर बीज सुरक्षित हो जाता है और कीड़ों, पक्षियों और चींटियों से सुरक्षित हो जाता है। बरसात में नमी मिलने पर इसमें अंकुरण आता है और पोषक तत्व भी निकट ही मिल जाते हैं।

इजिप्ट की प्राचीन तकनीक-

प्राचीन इजिप्ट में ऐसे उदाहरण मिले हैं जिसमें बीजों के बेहतर अंकुरण के लिए इस तरह का प्रयोग किया गया है इसी प्रकार पुरानी चीनी सभ्यता में भी सीड बॉल के प्रयोग मिले हैं। जापान में मसानोबु फुकुओका ने वैज्ञानिक रिसर्च के पश्चात इस तकनीक को समृद्ध किया।

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