जावेद अख्तर और शबाना की टिप्पणी साहित्यकार के लिए सही नहीं है : अहमद शाह

शबाना और जावेद साहब को हमेशा से प्रगतिशील लोगों के रूप में देखा गया है।

जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने पुलवामा में हुए हमले के बाद पाकिस्तान में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

उनके इस फैसले से पाकिस्तान की साहित्यिक और कला समुदाय काफी निराश है। इस बारे में पाक के प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक ओमायर अलवी ने कहा कि, शबाना और जावेद साहब को हमेशा से प्रगतिशील लोगों के रूप में देखा गया है।

उन्होंने भारत और पाकिस्तान के संबंधों को बेहतर बनाने के पक्ष में बात की है। पुलवामा की घटना पर उनकी ऐसी प्रतिक्रिया कराची में कला और साहित्यिक समुदाय के लिए एक आश्चर्य की बात है।

बता दें कि, कवि कैफी आजमी की 100वीं जयंती मनाने के लिए 23 और 24 फरवरी को पाकिस्तान की कला परिषद एक सम्मेलन आयोजित कर रही है।

इसी सम्मेलन में शामिल होने के लिए शबाना और जावेद को भी न्योता भेजा गया था। शबाना ने खुद इस महीने की शुरुआत में दो दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कराची जाने की पुष्टि की थी।

लेकिन, पुलवामा हमले के बाद दोनों कलाकारों ने इस सम्मेलन में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिससे पाकिस्तान कला परिषद से जुड़े लोग काफी दुखी हैं।

शबाना ने लिखा था कि, ‘इन सालों में पहली बार मुझे मेरा विश्वास कमजोर होता नजर आया है कि लोगों के बीच संपर्क होने से सत्ता प्रतिष्ठान को सही काम करने पर मजबूर कराया जा सकता है।

हमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान रोकना होगा।’ इस पर पाकिस्तान की कला परिषद के अध्यक्ष अहमद शाह ने कहा कि, ‘जावेद अख्तर और शबाना की टिप्पणी किसी साहित्यकार के लिए सही नहीं है।’

बता दें कि, 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 44 से ज्यादा जवान शहीद हो गए।

इस घटना के बाद जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने कराची में आयोजित होने वाले कैफी आजमी के जयंती समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला लिया था।

पाकिस्तान की कला परिषद के अध्यक्ष अहमद शाह ने कहा कि, शबाना और जावेद अख्तर के इस फैसले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

उन्होंने कहा, ‘मैं उनकी आलोचना नहीं कर रहा हूं, लेकिन पुलवामा हमले के बाद जो फैसला उन्होंने लिया है, उससे बहुत दुखी हूं।’

पाकिस्तान की कला परिषद के अध्यक्ष अहमद शाह ने भी जावेद अख्तर और शबाना आजमी के इस फैसले पर खेद जताया है। शाह ने कहा कि, उनकी टिप्‍पणी किसी साहित्‍यकार के लिए उचित नहीं लगती है।

जाने-माने अभिनेता शकील ने भी जावेद और शबाना के इस निर्णय पर खेद प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि, ‘दुख की बात यह है|

कि चरमपंथ के खिलाफ और लोगों के बीच आपसी संपर्क के पक्ष में हमेशा बोलने के बाद, उन्होंने अब उम्मीद छोड़ दी है।’

इस बीच, पाकिस्तानी सिनेमा थिएटरों के मालिकों एवं वितरकों ने आशंका जताई है कि भारतीय सिनेमा जगत की कड़ी प्रतिक्रिया का असर उनके व्यापार पर पड़ सकता है।

भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध वितरक नदीम मंडीवाला ने कहा कि, चीजें जैसा मोड़ ले रही हैं, मुझे डर है कि भारतीय फिल्म जगत पाकिस्तानी वितरकों को अपनी फिल्मों का निर्यात करना बंद कर देंगे।’

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