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जेट के कर्मचारियों ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, कहा-नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं

नई दिल्ली। वित्तीय संकट के कारण फिलहाल परिचालन बंद कर चुकी निजी विमान सेवा कंपनी जेट एयरवेज के शेयर गुरुवार को 30 फीसदी लुढ़क गए। वहीं जेट कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष किरण पावसकर ने कहा कि कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को चिट्ठी लिखी है।

उन्होंने कहा कि 16 हजार कर्मचारी बिना काम के बैठे हैं और नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है। पावसकर ने नरेश गोयल को हटाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि कंपनी अच्छी थी तो नरेश गोयल को क्यों निकाला गया। उन्होंने कहा कि 25 साल नरेश गोयल ने कंपनी को चलाया तो उन्हें निकालने का षडयंत्र क्यों रचा गया।

आपको बता दें कि एयरलाइन ने बुधवार शाम घोषणा की थी कि गुरुवार से उसकी सभी घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द रहेंगी। उसने कहा है कि परिचालन अस्थायी रूप से बंद किया जा रहा है। इसके लिए कंपनी ने नकदी की कमी का हवाला दिया है। इस घोषणा के बाद गुरुवार सुबह बाजार खुलते ही कंपनी के शेयर 24.15 अंक लुढ़ककर 217.70 अंक पर खुले। कल बाजार बंद होते समय यह 241.85 अंक पर रहा था।

जारी रहेगी जेट एयरवेज की बोली प्रक्रिया

जेट एयरवेज के ऋणदाता बैंकों ने उसकी हिस्सेदारी बेचने के लिए शुरू की गयी बोली प्रक्रिया जारी रखने का फैसला किया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में आठ बैंकों के कंसोर्टियम ने जेट एयरवेज में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए बोली प्रक्रिया आरंभ की है। इच्छुक निवेशकों से 12 अप्रैल तक तकनीकी निविदा यानी अभिरुचि पत्र आमंत्रित किये गये थे। वित्तीय बोली लगाने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल है जबकि बोली प्रक्रिया 12 मई तक पूरी होने की उम्मीद है।

कंसोर्टियम ने गुरुवार को एक बयान में बताया “ऋणदाताओं ने काफी विचार-विमर्श करने के बाद यह तय किया है कि जेट एयरवेज को बचाने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि अभिरुचि पत्र दाखिल करने वाले उन संभावित निवेशकों से बोली आमंत्रित की जाये जिन्हें 16 मई को निविदा दस्तावेज जारी किये जा चुके हैं। ऋणदाताओं को उम्मीद है कि बोली प्रक्रिया सफल रहेगी और पारदशीर् तरीके से कंपनी की हिस्सेदारी की उचित कीमत लगायी जायेगी।”

उल्लेखनीय है कि ऋणदाताओं से 400 करोड़ रुपये की फौरी मदद नहीं मिलने के बाद एयरलाइन ने सभी घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिलहाल रद्द करने की घोषणा करते हुए बुधवार रात कहा था कि अब उसके पास बोली प्रक्रिया का इंतजार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। ढाई दशक से भारतीय विमानन क्षेत्र में सेवा दे रही कंपनी पिछले कैलेंडर वर्ष में 4,244 करोड़ रुपये का नुकसान उठा चुकी है। किराये पर विमान देने वाली कंपनियों ने किराया नहीं चुकाने के कारण उससे विमान वापस ले लिये हैं। वह बैंकों का कर्ज लौटाने में विफल रही है तथा कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रही है।

कंसोर्टियम द्वारा शुरू की गयी समाधान प्रक्रिया के तहत उसे तत्काल नकदी के तौर पर 1,500 करोड़ रुपये परिचालन जारी रखने के लिए मिलने थे, लेकिन यह राशि भी नहीं मिलने के बाद उसे परिचालन बंद करना पड़ा।

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