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झारखंड के दंपति ने गीता पर जताया दावा , सुलझेगी पहेली डीएनए से

दो साल पहले पाकिस्तान से स्वदेश भारत लौटी मूक बधिर युवती गीता के माता-पिता का अब तक पता नहीं चल सका है. सरकार द्वारा गीता को उसके बिछड़े माता-पिता से मिलाने के सारे प्रयास अभी तक नाकाम साबित हुए हैं.

इस बीच, झारखंड के एक ग्रामीण दंपति ने गीता को अपनी खोई हुई बेटी बताया है. परिवार के दावे की सच्चाई को परखने के लिए दंपति को इंदौर में गीता से मिलवाने की तैयारी की जा रही है. जिला प्रशासन के एक आला अधिकारी ने बुधवार को कहा कि विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी से हुई चर्चा के मुताबिक मूक-बधिर गीता को झारखंड के गढ़वा जिले के बांदू गांव के रहने वाले परिवार से मिलवाया जाएगा.

27 अक्टूबर को दोनों के बीच स्थानीय कलेक्टर कार्यालय में यह मुलाकात होगी. साल 2015 में पाकिस्तान से लौटने के बाद गीता इंदौर में मूक-बधिरों के लिए चलाई जाने वाली एक गैर-सरकारी संस्था के पास रह रही है.

डीएनए सैंपल से खून के रिश्ते की पुष्टि की जाएगी

अधिकारी ने बताया कि जरूरत पड़ी तो गीता और झारखंड के परिवार के सदस्यों के डीएनए नमूने भी लिए जा सकते हैं. जिससे इनका मिलान कर इनके बीच खून के रिश्ते की पुष्टि की जा सके. अधिकारी के मुताबिक डीएनए नमूनों को जांच के लिए सीबीआई की नई दिल्ली स्थित केंद्रीय अपराध विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) भेजा जा सकता है.

बांदू गांव के विजय राम और उनकी पत्नी माला देवी का दावा है कि पाकिस्तान से लौटी गीता कोई और नहीं, बल्कि उनकी गुमशुदा बेटी टुन्नी कुमारी उर्फ गुड्डी है. इस दंपति के मुताबिक उनकी बेटी टुन्नी 9 साल पहले बिहार के रोहतास जिले में अपने ससुराल से लापता हो गई थी.

एक दशक पहले गीता गलती से सीमा लांघने के कारण पाकिस्तान पहुंच गई थी. विदेश मंत्रालय के विशेष प्रयासों के कारण गीता को 26 अक्टूबर, 2015 को भारत वापस लाया जा सका था.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक अक्टूबर को प्रसारित अपने वीडियो संदेश में लोगों से गीता के माता-पिता की तलाश में सरकार की मदद करने की अपील की थी. उन्होंने गीता को उसके बिछड़े माता-पिता से मिलवाने में मदद करने वाले को एक लाख रुपए का इनाम देने की भी घोषणा की थी

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