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झारखंड: अलग धर्मकोड के लिए विधानसभा का विशेष सत्र 11 नवंबर को, आदिवासियों की है मांग

उनकी मंजूरी के बाद सत्र बुलाने के संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया जायेगा।

जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड कॉलम की खातिर विधानसभा से प्रस्‍ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की आदिवासी संगठनों की मांग जल्‍द पूरी होने वाली है। झारखंड सरकार ने सरना-आदिवासी धर्म कोड से संबंधित प्रस्‍ताव के लिए 11 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। संबंधित प्रस्‍ताव स्‍वीकृति के लिए राज्‍यपाल द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया गया है। उनकी मंजूरी के बाद सत्र बुलाने के संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया जायेगा।

दुमका उप चुनाव के दौरान झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्‍य स्‍थापना दिवस ( 15 नवंबर) के पूर्व विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्म कोड के संबंध में प्रस्‍ताव पास कर केंद्र को भेजने की घोषणा की थी। प्रस्‍ताव सरना धर्म कोड को होगा या आदिवासी धर्म कोड का यह पूरी तरह स्‍पष्‍ट नहीं है।

झारखंड के विभिन्‍न आदिवासी संगठन 2021 की जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग को लेकर इधर लगातार आंदोलनरत हैं। बीते दो माह के भीतर आधा दर्जन से अधिक बार ईसाई संगठन सहित विभिन्‍न आदिवासी संगठनों के लोगों ने मुख्‍यमंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंप सरना-आदिवासी धर्म कोड को विधानसभा से पारित कर केंद्र को भेजने की मांग कर चुके हैं। सरना या आदिवासी धर्म कोड के प्रस्‍ताव में तकनीकी फर्क है।

देश के विभिन्‍न राज्‍यों में कोई एक सौ आदिवासी समुदाय हैं। बहुलता के हिसाब से अलग-अलग नाम को धर्म कोड में शामिल करने की मांग उठती रही है। झारखंड में सरना धर्म कोड पर जोर रहा। 2015 में जनगणना महानिबंधक ने सरना धर्म कोड नाम को लेकर ही आपत्ति कर दी थी। तर्क यह कि अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग नाम से धर्म कोड की मांग उठ रही है जो व्‍यापहारिक नहीं है। उसके बाद आदिवासी संगठनों ने देशव्‍यापी अभियान चलाकर आदिवासी धर्म कोड नाम पर सहमति बनाई। मगर अभी भी कुछ संगठन सरना धर्म कोड के नाम पर अड़े हुए हैं। प्रस्‍ताव सरना धर्म कोड के नाम से पारित हुआ तो 2015 वाली समस्‍या फिर खड़ी हो सकती है।

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